1. कोरबा परिवहन विभाग में बड़ा खुलासा धीरज परिवहन सुविधा केंद्र पर नियमों को ताक पर रखकर अवैध वसूली का संगीन आरोप!
2. आरटीआई से डर गए संचालक? धीरज परिवहन सुविधा केंद्र द्वारा महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज छुपाने का सनसनीखेज मामला।
3. अधिकारियों की नाक के नीचे खेल ₹100 की जगह वसूले जा रहे ₹200 से अधिक, आखिर कब जागेगा कोरबा आरटीओ (RTO)?
4. परिवहन सुविधा केंद्र मार्गदर्शिका-2022 की उड़ीं धज्जियां, अनाधिकृत व्यक्तियों के हाथों में थमाई गई केंद्र की कमान!
5. अतिरिक्त परिवहन आयुक्त के कड़े आदेशों को ठेंगा सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और स्टॉक पंजी गायब, क्या बंद होगा धीरज परिवहन केंद्र?
6. स्वयं के शपथ-पत्र में फंसे संचालक धीरज देवांगन; फर्जीवाड़ा साबित होने पर प्राधिकार पत्र निरस्त होना तय!
7. कलेक्टर और आरटीओ मौन क्यों? कोरबा के टी.पी. नगर में जनता की गाढ़ी कमाई पर खुलेआम डाका!
8. सुरक्षित दस्तावेज का कोई हिसाब नहीं, परिवहन विभाग की साख पर लगा गहरा बट्टा।
9. शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने खोला मोर्चा बैंक गारंटी जब्त करने और दंडात्मक कार्रवाई के लिए आरटीओ को सौंपे अकाट्य सबूत।
10. क्या नियमों का पालन सिर्फ कागजों पर? कोरबा जिला परिवहन अधिकारी के भौतिक निरीक्षण प्रतिवेदन पर उठे गंभीर सवाल!
विशेष खोजी रिपोर्ट: कोरबा आरटीओ की नाक के नीचे चल रहा था अवैध खेल, धीरज परिवहन सुविधा केंद्र के प्राधिकार पत्र को निरस्त करने की उठी मांग!
मुख्य समाचार (कोरबा, छत्तीसगढ़)
छत्तीसगढ़ शासन के परिवहन नियमों और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए कोरबा के टी.पी. नगर (राजू होटल के सामने) में संचालित ‘धीरज परिवहन सुविधा केंद्र’ (कोड: CG-12/00021/, प्राधिकार पत्र क्रमांक: CG12/PSK/KORBA/07) के खिलाफ एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है.

शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर जिला परिवहन अधिकारी, कोरबा के समक्ष दिनांक 25/06/2026 को एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है, क्योंकि सौंपे गए दस्तावेज सीधे तौर पर केंद्र संचालक धीरज कुमार देवांगन को कटघरे में खड़ा करते हैं।
नियमों के उल्लंघन का कच्चा चिट्ठा: क्यों मजबूर हैं अधिकारी कार्रवाई के लिए?
“परिवहन सुविधा केंद्र मार्गदर्शिका-2022” के तहत आम जनता को आसानी से लर्निंग लाइसेंस उपलब्ध कराने और शिक्षित युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से इन केंद्रों को मंजूरी दी गई थी। लेकिन धीरज परिवहन सुविधा केंद्र में इस योजना के मूल उद्देश्यों की ही धज्जियां उड़ा दी गईं।
निर्धारित दर से अधिक की अवैध वसूली मार्गदर्शिका के बिंदु क्रमांक 11के अनुसार, किसी भी ऑनलाइन आवेदन हेतु सेवा शुल्क मात्र ₹100 और लर्निंग लाइसेंस हेतु शुल्क ₹50 निर्धारित है। परंतु, प्राप्त शिकायतों और नोटिंग के अनुसार, आवेदकों से ₹200 या उससे भी अधिक की अवैध वसूली की जा रही है। मार्गदर्शिका के बिंदु क्रमांक 5 (II) के तहत निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने पर प्राधिकार पत्र को सीधे निरस्त करने का कड़ा प्रावधान है।
आरटीआई के तहत जानकारी छुपाना और गुमराह करना सूचना के अधिकार के तहत केंद्र से संबंधित दैनिक रिकॉर्ड और स्टॉक पंजी की जानकारी मांगी गई थी, जिसे संचालक द्वारा छुपाया गया और अधूरी जानकारी दी गई। मार्गदर्शिका के बिंदु क्रमांक 7 (II) एवं 7 (VI) के अनुसार, सभी इलेक्ट्रॉनिक एवं भौतिक अभिलेखों का सुरक्षित अनुरक्षण करना संचालक की विहित जिम्मेदारी है। जानकारी छुपाना और लापरवाही बरतना यह साबित करता है कि केंद्र में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी चल रही है।
अनाधिकृत व्यक्तियों द्वारा केंद्र का अवैध संचालन
मार्गदर्शिका के बिंदु क्रमांक 7 (VIII) एवं (IX) में यह स्पष्ट उल्लेख है कि जिस व्यक्ति के नाम पर केंद्र अधिकृत है, उसे ही इसका संचालन करना होगा। यदि परिवार के किसी अन्य सदस्य या बाहरी व्यक्ति द्वारा केंद्र संचालित करते पाया गया, तो लाइसेंस तुरंत रद्द होगा। विभागीय नोटिंग के अनुसार, धीरज देवांगन के इस केंद्र को नियमों को ताक पर रखकर अनाधिकृत बाहरी व्यक्तियों द्वारा संचालित किया जा रहा है।
सीसीटीवी और तकनीकी नियमों को ठेंगा अतिरिक्त परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर (IPS) द्वारा दिनांक 10/11/2025 को जारी कड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार, लर्निंग लाइसेंस टेस्ट कक्ष में सीसीटीवी कैमरा होना और उसकी 6 महीने की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना अनिवार्य है। इस केंद्र द्वारा न तो सीसीटीवी का बैकअप पारदर्शी रखा गया और न ही दैनिक स्टॉक पंजी का कोई सही हिसाब दिया गया, जो सीधे तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना है।
स्वयं का घोषणा-पत्र ही बना संचालक के गले की फांस
शिकायतकर्ता ने विभाग को संचालक धीरज कुमार देवांगन द्वारा दिनांक 17-05-2022 को हस्ताक्षरित मूल आवेदन और घोषणा-पत्र की प्रति भी सौंपी है। इस घोषणा-पत्र में संचालक ने स्वयं शपथ ली थी।
मैं घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त आवेदन पत्र में मेरे स्वयं के द्वारा भरी गई जानकारी पूर्णतः सत्य है यदि किसी भी प्रकार की जानकारी असत्य पाई जाती है तो मेरे आवेदन को निरस्त कर मुझ पर कार्यवाही की जा सकेगी।
जब संचालक खुद अपने ही घोषणा-पत्र की शर्तों पर पूरी तरह विफल साबित हो चुके हैं, तो जिला परिवहन अधिकारी के पास इस केंद्र को संरक्षण देने का कोई विधिक आधार नहीं बचता।
शिकायतकर्ता की मांग तत्काल हो कड़ी दंडात्मक कार्रवाई आवेदक जितेंद्र कुमार साहू ने जनहित और प्रशासनिक पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए जिला परिवहन अधिकारी कोरबा से निम्नलिखित कड़े कदम उठाने की मांग की है,
धीरज परिवहन सुविधा केंद्र (कोड: CG-12/00021/) का प्राधिकार पत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और आरटीआई के तहत जानकारी छुपाने के मामले में संचालक के विरुद्ध कठोर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाए।
संचालक द्वारा विभाग के पास जमा की गई ₹1 लाख या विहित बैंक गारंटी की राशि को तत्काल राजसात किया जाए।
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