कोरबा / कटघोरा: कटघोरा मार्ग पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब RTO (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) की टीम द्वारा गाड़ियों की चेकिंग की सूचना पर मीडिया की टीम मौके पर पहुंची। हालांकि, जिस जानकारी को लेकर मीडिया टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची थी, मौके की सच्चाई उससे बिल्कुल अलग नजर आई।

मीडिया कर्मियों के पहुंचते ही मामले में एक नया मोड़ आ गया। सवाल और जानकारी लेने की प्रक्रिया शुरू होती, उससे पहले ही RTO अधिकारियों ने बिना कोई स्पष्टीकरण दिए अपनी गाड़ी स्टार्ट की और मौके से रवाना हो गए। अधिकारियों के इस रवैये ने पूरी कार्रवाई की नीयत पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिविल ड्रेस में कौन थे वो दो लोग?
घटनास्थल पर मौजूद मीडिया टीम की पड़ताल में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई:
वर्दी में सिर्फ एक अधिकारी: चेकिंग के दौरान केवल एक अधिकारी RTO की आधिकारिक ड्रेस में मौजूद था।
सिविल ड्रेस में दो अज्ञात लोग: अधिकारी के साथ दो अन्य व्यक्ति बिना किसी यूनिफॉर्म या आधिकारिक पहचान के सिविल ड्रेस (सादे कपड़ों) में चेकिंग की प्रक्रिया में शामिल थे।
स्थानीय चालकों और राहगीरों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या RTO विभाग की चेकिंग प्रक्रिया में प्राइवेट या अनधिकृत व्यक्तियों को शामिल किया जा रहा है? आखिर यह रूटीन जांच थी या इसके पीछे अवैध वसूली का कोई खेल चल रहा था?
अधिकारियों का पक्ष / RTO प्रशासन से सीधे सवाल
मीडिया की मौजूदगी से बचकर निकलना इस बात की ओर इशारा करता है कि मामले की तह तक पहुंचना बेहद जरूरी है। इस पूरी घटना पर निष्पक्षता बनाए रखने और जनता के सामने सच लाने के लिए संबंधित RTO अधिकारी एवं विभाग से निम्नलिखित बिंदुओं पर जवाब मांगा जा रहा है:
अचानक रवानगी क्यों? – मीडिया टीम के पहुंचने पर अधिकारी जानकारी देने के बजाय अचानक वहां से क्यों चले गए?
सादे कपड़ों में मौजूद लोग कौन थे? – चेकिंग प्वाइंट पर अधिकारी के साथ मौजूद सिविल ड्रेस वाले दो व्यक्तियों की आधिकारिक भूमिका क्या थी?
जांच का अधिकृत आदेश: – क्या कटघोरा मार्ग पर उस समय चेकिंग का कोई आधिकारिक रोस्टर या लिखित आदेश जारी किया गया था?
विभाग का पक्ष: इस मामले में संबंधित RTO अधिकारी और जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया जा रहा है। उनका वक्तव्य आते ही खबर को अपडेट किया जाएगा।
जनता का सवाल
यदि यह नियमानुसार की जा रही रूटीन जांच थी, तो मीडिया के सवालों से दूरी बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद अब देखना यह होगा कि परिवहन विभाग और जिला प्रशासन इस पूरे मामले को किस तरह संज्ञान में लेता है और क्या इस पर कोई पारदर्शी जांच कराई जाती है।




