[4:12 PM, 8/23/2026] +91 86022 46033: गांव के नौनिहालों की सुरक्षा से खिलवाड़ और लालफीताशाही की सुस्ती को दरकिनार करते हुए कोरबा जिले के ग्राम पंचायत बेला के सरपंच ने एक मिसाल पेश की है। वर्षों से जर्जर हो चुके प्राथमिक स्कूल के भवन को गिराने के लिए प्रशासन से कई बार पत्राचार किया गया था, लेकिन महीनों तक अनुमति न मिलने और लगातार मंडराते खतरे को देखते हुए सरपंच ने अपने स्वविवेक और अधिकारों का उपयोग कर इस जर्जर ढांचे को ध्वस्त (डिसमेंटल) करा दिया।
सरपंच का यह फैसला उन अधिकारियों के मुंह पर करारा तमाचा है जो कागजी कार्रवाई में उलझकर मासूमों की जान जोखिम में डाले हुए थे। बारिश के इस मौसम में भवन का कोई भी हिस्सा ढह सकता था, जिससे बड़ा हादसा होने का अंदेशा बना हुआ था। ग्राम पंचायत ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की अनुमति का इंतजार बच्चों की सुरक्षा से बड़ा नहीं हो सकता।
सरपंच के इस कदम की प्रमुख बातें:
जनहित और सुरक्षा सर्वोपरि: हादसों का इंतजार करने के बजाय सरपंच ने बच्चों और ग्रामीणों की जानमाल की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता दी।
समय पर लिया गया ठोस फैसला: प्रशासनिक देरी के कारण किसी अनहोनी का इंतजार करने की जगह साहसी निर्णय लेकर बड़ी दुर्घटना को टाला गया।
ग्रामीणों का मिला पूर्ण समर्थन: गांव के अभिभावकों और ग्रामीणों ने सरपंच की इस त्वरित और जिम्मेदार कार्रवाई की जमकर सराहना की है।
ग्राम पंचायत का मानना है कि पंचायत राज व्यवस्था का मूल उद्देश्य ही ग्रामीणों की तुरंत मदद और सुरक्षा करना है। अब इस खाली जमीन का उपयोग बच्चों के खेलने या नए, सुरक्षित भवन के निर्माण के लिए किया जाएगा। सरपंच का यह कदम साबित करता है कि जब बात सुरक्षा और जनहित की हो, तो साहसिक और कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
[4:16 PM, 8/23/2026] +91 86022 46033: Bna दीजिए



























