कोरबा। जिले में कबाड़ कारोबार को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब राताखार क्षेत्र की यह तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
तस्वीर में खुले मैदान में भारी मात्रा में लोहे का कबाड़, बड़े-बड़े लोहे के पाइप, गैस सिलेंडरनुमा वस्तुएं और अन्य धातु सामग्री बिखरी दिखाई दे रही है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में कबाड़ आखिर यहां पहुंच कैसे रहा है और इसका स्रोत क्या है?
कुछ दिन पहले ही कबाड़ कारोबारियों को लेकर बैठक और कार्रवाई की चर्चा हुई थी। इसके बाद भी अगर इस तरह कबाड़ के बड़े-बड़े ढेर दिखाई दे रहे हैं, तो क्या सिर्फ बैठक और चेतावनी से व्यवस्था सुधरने वाली है?

सबसे बड़ा सवाल—आखिर प्रशासन कब जागेगा?
क्या हर कबाड़ यार्ड में आने वाले माल की जांच हो रही है?
क्या यह पता लगाया जा रहा है कि कबाड़ कहां से खरीदा गया?
क्या संबंधित व्यापारियों के पास वैध दस्तावेज और अनुमति है?
क्या औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले स्क्रैप का पूरा हिसाब-किताब जांचा जा रहा है?
कोरबा में कबाड़ कारोबार को लेकर पहले भी कार्रवाई होती रही है। जून में पुलिस ने करीब 16 टन कबाड़ और चार वाहन जब्त किए थे। वहीं मार्च में बिना अनुमति संचालित कबाड़ ठिकानों पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई भी की थी।
और अब हाल के दिनों में कबाड़ से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई और पुलिसकर्मियों के निलंबन ने इस पूरे कारोबार की निगरानी पर और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तो क्या यह तस्वीर महज कबाड़ का ढेर है… या किसी बड़े नेटवर्क की तरफ इशारा?
प्रशासन को अब सिर्फ कार्रवाई की घोषणा नहीं, बल्कि यह भी बताना चाहिए कि यह कबाड़ आया कहां से, किसका है और इसकी जांच किस स्तर तक पहुंची है?
कहीं ऐसा न हो कि प्रशासन अगली बड़ी घटना का इंतजार करता रह जाए और तब तक कबाड़ का यह कारोबार और बड़ा रूप ले ले।
जनता पूछ रही है—आखिर इस कबाड़ के पहाड़ के पीछे का सच क्या है?
और प्रशासन कब देगा इन सवालों का जवाब?
📍 स्थान: राताखार, कोरबा, छत्तीसगढ़


























