कोरबा (छत्तीसगढ़)। जिले के हरदीबाजार क्षेत्र से शासकीय राशन यानी PDS चावल की कथित कालाबाजारी का मामला सामने आया है। गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले चावल को कथित तौर पर राशन कार्डधारी निजी दुकानों में बेच रहे हैं। इस पूरे मामले का लाइव वीडियो सामने आने के बाद सरकारी राशन व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मीडिया ने मामला उठाया, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
मीडिया टीम को जब सरकारी चावल की कथित खरीद-फरोख्त की जानकारी मिली, तो मामले को सामने लाते हुए 2 अगस्त 2026 को पाली SDM को फोन के माध्यम से पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया। बताया गया कि मामले में जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था।
लेकिन सवाल यह है कि आश्वासन के इतने दिन बाद भी कार्रवाई आखिर कहां तक पहुंची?
क्या मामले की जांच शुरू हुई?
क्या संबंधित लोगों से पूछताछ की गई?
क्या वीडियो की सत्यता की जांच हुई?
और यदि मामला सही पाया गया तो अब तक जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या कार्रवाई के बजाय सिर्फ आश्वासन?
सरकारी चावल की खरीद-फरोख्त का वीडियो सामने आने के बावजूद यदि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई नहीं करता है, तो यह स्थिति अपने आप में कई सवाल खड़े करती है। क्या प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है या फिर शिकायतों और मीडिया की सूचना को केवल आश्वासन देकर टाला जा रहा है?
वहीं, किसी अधिकारी की मिलीभगत का दावा बिना जांच के करना उचित नहीं होगा, लेकिन यदि कार्रवाई में लगातार देरी हो रही है तो संभावित मिलीभगत की आशंका की निष्पक्ष जांच भी प्रशासन के लिए जरूरी हो जाती है।
गरीबों के राशन पर किसकी नजर?
PDS व्यवस्था का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाना है। ऐसे में यदि सरकारी चावल खुलेआम निजी दुकानों तक पहुंच रहा है, तो यह सिर्फ कालाबाजारी का सवाल नहीं, बल्कि सरकारी राशन वितरण व्यवस्था की निगरानी पर भी बड़ा सवाल है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों तक पहुंचता है या फिर यह मामला भी कार्रवाई के आश्वासन तक ही सीमित रह जाता है।
जनता का सीधा सवाल है—जब वीडियो सामने है और प्रशासन को 2 अगस्त को ही जानकारी दी जा चुकी थी, तो आखिर कार्रवाई के लिए और कितना इंतजार?
नोट: वीडियो में दिख रही गतिविधियों और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। संबंधित पक्ष का जवा





















