कोरबा। वन विभाग के बालको वन परीक्षेत्र में सरकारी पैसों की बर्बादी और भ्रष्टाचार की एक बड़ी तस्वीर सामने आई है। तत्कालीन वन परीक्षेत्र अधिकारी के कार्यकाल के दौरान जिस एनीकेट का निर्माण बड़े-बड़े दावों के साथ कराया गया था, वह महज दो साल के भीतर ही जर्जर होकर ध्वस्त हो चुका है।
पानी के बहाव को रोकने और जल संरक्षण के उद्देश्य से बनाए गए इस एनीकेट का ढांचा इतनी जल्दी जवाब दे जाएगा, इसकी उम्मीद स्थानीय ग्रामीणों को भी नहीं थी। एनीकेट के टूटने से न केवल सरकारी खजाने को लाखों रुपये की चपत लगी है, बल्कि जिस मंशा से इसका निर्माण कराया गया था, उस पर भी पूरी तरह पानी फिर गया है।
लोहे की जगह लकड़ियों का ‘जुगाड़’
एनीकेट का मुख्य ढांचा तो टूटा ही है, साथ ही इसके गेटों की रेलिंग भी पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। देखरेख और मरम्मत के अभाव में स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि अब एनीकेट के गेटों को संचालित करने के लिए लोहे के सिस्टम की जगह लकड़ियों का सहारा लिया जा रहा है।
गुणवत्ता पर उठ रहे गंभीर सवाल
सिर्फ दो साल में एनीकेट और उसकी गेट का इस कदर बर्बाद हो जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता (Quality) पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
क्या निर्माण के समय स्वीकृत तकनीकों और मानकों का पालन किया गया था?
क्या घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण यह ढांचा पहली-दूसरी बारिश का थपेड़ा भी नहीं सह सका?
निर्माण के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों ने इसकी गुणवत्ता की निगरानी क्यों नहीं की
कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि जल संरक्षण के नाम पर केवल औपचारिकता कागजी विकास दिखाया गया है अब देखना यह होगा कि वन विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले पर संज्ञान लेकर निर्माण कराने वाले तत्कालीन अधिकारियों पर और ठेकेदार के खिलाफ जांच बैठाते हैं या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा


