छत्तीसगढ़ / कोरबा
जनता को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से स्वीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण शुरू होते ही भ्रष्टाचार और गंभीर अव्यवस्था के घेरे में आ गया है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन की देखरेख में शारदा विहार में चल रहे इस निर्माण कार्य में ठेकेदार प्रतीक अग्रवाल द्वारा नियमों, गुणवत्ता और आम जनता की सहूलियत को खुलेआम ताक पर रख दिया गया है। निर्माण में इस्तेमाल हो रही दोयम दर्जे की सामग्री और मुख्य मार्ग को बंधक बनाए जाने से स्थानीय निवासियों का सब्र अब टूट चुका है। इस पूरे मामले को लेकर नागरिक अब सीधे कलेक्टर जनदर्शन में साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे विभाग और ठेकेदार खेमे में हड़कंप मचने के आसार हैं।

सामने खाली सरकारी जमीन, फिर भी सड़क पर मलबा, ठेकेदार प्रतीक अग्रवाल की मनमानी
निर्माण स्थल के ठीक सामने शासन का एक विशाल खाली भूखंड उपलब्ध है, जिसका उपयोग निर्माण सामग्री रखने के लिए सुगमता से किया जा सकता था। इसके बावजूद ठेकेदार प्रतीक अग्रवाल ने मुख्य मार्ग पर ही भारी मात्रा में मिट्टी, ईंट, गिट्टी और रेत का अंबार लगा दिया है।
तय नियमों और सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर पूरा रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और क्षेत्रीय नागरिकों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो चुकी है। सड़क सुरक्षा, चेतावनी बोर्ड या आवागमन डायवर्जन का कोई इंतजाम नहीं किया गया है, जिससे हर वक्त गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
रद्दी सीमेंट और गुणवत्ता से समझौता,कमीशनखोरी के कयास
स्वास्थ्य केंद्र जैसे संवेदनशील भवन में तकनीकी मानकों कंक्रीट की मजबूती और तय मापदंडों का कड़ाई से पालन होना अनिवार्य है। इसके उलट मौके पर घटिया व रद्दी स्तर के सीमेंट और अमानक निर्माण सामग्री का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। तकनीकी मापदंडों में की जा रही इस मनमानी हेरफेर को लेकर क्षेत्र में चर्चा है कि यह पूरा खेल कमीशन की बंदरबांट और कागजों पर खानापूर्ति करने के मकसद से धड़ल्ले से चलाया जा रहा है।
इस निर्माण की तकनीकी व प्रशासनिक निगरानी के लिए CGMSC और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय हैं, लेकिन धरातल पर उनकी भूमिका केवल आंखें मूंदने तक सीमित नजर आ रही है, निर्माण स्थल पर नियमित उपस्थित रहकर कार्य की गुणवत्ता, सीमेंट-कंक्रीट के अनुपात और सामग्री की ऑन-साइट टेस्टिंग की जांच करना है, लेकिन अमानक सीमेंट और घटिया सामग्री के उपयोग के बावजूद मौके पर कोई तकनीकी आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई।
सहायक अभियंता एवं कार्यपालन अभियंता के कर्तव्य है, की औचक तकनीकी निरीक्षण करना लैब टेस्टिंग रिपोर्ट को सत्यापित करना तथा वर्क-ऑर्डर व सुरक्षा शर्तों के उल्लंघन पर ठेकेदार को नोटिस जारी कर काम रुकवाना।
लेकिन हकीकत मे मुख्य मार्ग पर अवैध रूप से सामग्री डंप होने और रास्ता बंद होने के बाद भी अफसरों ने ठेकेदार प्रतीक अग्रवाल पर कोई सख्त रुख नहीं अपनाया।
प्रोजेक्ट डिवीजन व CGMSC उच्चाधिकारी
जनता के पैसों से बन रहे भवनों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और सुरक्षा व गुणवत्ता मानकों में लापरवाही पर ठेकेदार पर पेनल्टी लगाना या ब्लैकलिस्ट करना।लेकिन हकीकत मे आम जनता की परेशानी और नियमों की अनदेखी के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने अब तक मौके का जायजा लेना मुनासिब नहीं समझा।
सड़क जाम, घटिया निर्माण सामग्री और जिम्मेदार इंजीनियरों की निष्क्रियता से नाराज क्षेत्रवासियों ने अब प्रशासनिक स्तर पर निर्णायक लड़ाई का मन बना लिया है। चर्चा है कि आगामी कलेक्टर जनदर्शन में मोहल्लेवासी और सामाजिक कार्यकर्ता संयुक्त रूप से फोटो व तकनीकी साक्ष्यों के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे।
मांग की जा रही है कि जिला प्रशासन तत्काल एक स्वतंत्र तकनीकी फ्लाइंग स्क्वॉड मौके पर भेजकर प्रयुक्त सामग्री के नमूने लैब परीक्षण के लिए जब्त करे। साथ ही ठेकेदार प्रतीक अग्रवाल द्वारा सड़क पर फैलाई गई सामग्री को तुरंत हटवाकर मार्ग बहाल कराया जाए और ठेकेदार सहित अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने वाले लापरवाह इंजीनियरों पर कड़ी विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई की जाए।


