कोरबा। बांकीमोंगरा नगर पालिका परिषद में वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्यय से जुड़े दस्तावेजों की उपलब्धता और जानकारी दिए जाने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित समयसीमा में पूरी और संतोषजनक तरीके से उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाते हुए अब मामले में विशेष ऑडिट की मांग उठाई गई है।
जानकारी के अनुसार, आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत नगर पालिका से वित्तीय वर्ष 2025-26 से संबंधित आय-व्यय एवं वित्तीय दस्तावेजों की जानकारी मांगी थी। आवेदन के बावजूद अपेक्षित जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने सूचना आयोग में अपील का रास्ता अपनाया।
बताया गया है कि 8 जून 2026 को जन सूचना अधिकारी एवं लेखा अधिकारी सुजीत कुमार मेहता के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर वित्तीय वर्ष 2025-26 से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। आवेदक का आरोप है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर उन्हें अधूरी और भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराई गई।
इसके बाद 23 जुलाई 2026 को मुख्य नगर पालिका अधिकारी के समक्ष सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19(1) के तहत प्रथम अपील दायर की गई। आवेदक के मुताबिक, वहां से भी संतोषजनक निराकरण नहीं होने पर 16 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में धारा 19(3) के तहत द्वितीय अपील प्रस्तुत की गई।
अब विशेष ऑडिट की मांग
मामले को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रधान महालेखाकार, छत्तीसगढ़ से बांकीमोंगरा नगर पालिका के वित्तीय लेन-देन का विशेष ऑडिट कराने की मांग की है। मांग में वित्तीय वर्ष 2025-26 के समस्त आय-व्यय, बिल-वाउचर, कैशबुक एवं बैंक खातों सहित वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की बात कही गई है।
सरकार से सवाल—आखिर विशेष ऑडिट कब?
पूरे मामले ने नगर पालिका की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि वित्तीय दस्तावेज नियमानुसार उपलब्ध हैं तो आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारी समय पर और पूरी तरह उपलब्ध कराने में परेशानी क्यों हुई? वहीं यदि दस्तावेजों में कोई कमी या अनियमितता नहीं है तो विशेष ऑडिट कराने में सरकार को क्या आपत्ति है?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और बांकीमोंगरा नगर पालिका के वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्यय का विशेष ऑडिट कब कराया जाता है।


