SN इंडिया न्यूज़ एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
कोरबा: नवरात्र का पावन पर्व मां दुर्गा की आराधना, भक्ति और शक्ति का प्रतीक है, लेकिन इन दिनों कोरबा जिले में गरबा आयोजनों के नाम पर चल रहे कमर्शियल हथकंडों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र सारथी ने गरबा आयोजनों में पास व्यवस्था, कपल एंट्री और महंगे प्रवेश शुल्क पर कड़ी आपत्ति जताई है.
मुख्य बातें जो छाई हुई हैं:
* भक्ति के लिए पास क्यों खरीदें?
जितेंद्र सारथी ने सवाल किया है कि नवरात्र मां की उपासना का पर्व है, ऐसे में आम श्रद्धालुओं, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को धार्मिक आयोजनों में शामिल होने के लिए पास खरीदने की आवश्यकता क्यों पड़नी चाहिए?
* आरती में कम भीड़, गरबा में सैलाब—बदलती प्राथमिकताएं:
त्योहारों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर माता की आरती के समय बहुत कम लोग दिखाई देते हैं, जबकि गरबा शुरू होते ही सैकड़ों लोग उमड़ पड़ते हैं, जो धार्मिक प्राथमिकताओं पर एक बड़ा सवालिया निशान है.
* संस्कृति और मर्यादा की रक्षा:
सारथी ने दो टूक कहा कि गरबा केवल नृत्य और मनोरंजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा, भारतीय संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बनना चाहिए. मंचों पर अश्लील गानों और आपत्तिजनक प्रस्तुतियों पर रोक लगनी चाहिए.
* छोटी समितियों से सीख लें बड़े आयोजक:
जिले की कई छोटी समितियां सीमित संसाधनों के बावजूद बिना एक भी पास बेचे भव्य और अनुशासित गरबा व धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं. बड़े आयोजकों को इनसे सीख लेने की जरूरत है.
निष्कर्ष और अपील
आयोजकों को सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के नाम पर आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं डालना चाहिए. व्यवस्थाएं ऐसी होनी चाहिए जिनसे धार्मिक परंपराओं का पूरा सम्मान हो और समाज का हर वर्ग बिना किसी भेदभाव के उत्साहपूर्वक उत्सव में भाग ले सके.


