रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच के बाद आबकारी विभाग के तत्कालीन अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग की ओर से 17 अक्टूबर को निलंबन आदेश जारी किया गया, जिसमें कार्रवाई को 14 अक्टूबर 2026 से प्रभावी माना गया है।

विशेष अदालत में अभियोग पत्र के बाद बढ़ी कार्रवाई
मामला EOW/ACB में दर्ज अपराध क्रमांक 04/2024 से जुड़ा है। जांच के दौरान श्रीवास्तव के खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप पाए जाने का उल्लेख शासन के आदेश में किया गया है। जांच पूरी होने के बाद 13 अक्टूबर को पूरक अभियोग पत्र तैयार किया गया और अगले दिन यानी 14 अक्टूबर को रायपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत में पेश किया गया।
उस समय आशीष श्रीवास्तव रायपुर में उपायुक्त आबकारी के पद पर पदस्थ थे।
भ्रष्टाचार से लेकर जालसाजी और षड्यंत्र तक के आरोप
EOW/ACB के प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में संशोधन के बाद लागू प्रावधानों की विभिन्न धाराओं के साथ भारतीय दंड विधान की कई धाराएं लगाई गई हैं।
मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 7-क, 8, 12 और 13 तथा IPC की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी, 201 और 109 का उल्लेख है। इन प्रावधानों के तहत भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, दस्तावेजों की कूटरचना, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य से छेड़छाड़ जैसे आरोपों की जांच की जा रही है।
निलंबन के दौरान नवा रायपुर रहेगा मुख्यालय
शासन ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(ख) के तहत निलंबन की कार्रवाई की है। आदेश के मुताबिक निलंबन अवधि में आशीष श्रीवास्तव का मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, नवा रायपुर निर्धारित किया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। आदेश राज्यपाल के नाम से जारी हुआ है और विशेष सचिव देवेंद्र सिंह भारद्वाज के डिजिटल हस्ताक्षर से इसे जारी किया गया है।
कार्रवाई बड़ी, लेकिन फैसला अदालत में होगा
शासन के आदेश में लगाए गए प्रथम दृष्टया आरोपों को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। मामले में आरोपों की वास्तविक स्थिति और दोष या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय विशेष अदालत की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
फिलहाल शराब घोटाले की जांच के बीच आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के निलंबन को सरकार की ओर से उठाया गया एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है

