कोरबा जिले के बायपास रोड स्थित ओम प्रकाश ट्रेडर्स बादल नामक कबाड़ी व्यवसायी द्वारा स्थानीय न्यूज़ पोर्टल SN इंडिया न्यूज़ के प्रमुख संपादक श्री योगेश सलूजा को फँसाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि उक्त व्यापारी ने पत्रकार की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से उनके मोबाइल नंबर पर रात्रि लगभग 10:30 बजे एक हज़ार रुपए फोनपे के माध्यम से भेजे, और उसके बाद यह आरोप लगाया कि योगेश सलूजा उनसे पहले ही बीस हज़ार रुपए नगद ले चुके हैं तथा अब और धन की मांग कर रहे हैं।

पत्रकार की रिपोर्टिंग बनी विवाद की वजह
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब दिनांक 23 अक्टूबर 2025 को SN इंडिया न्यूज़ पोर्टल पर “कबाड़ियों की मनमानी चरम पर — बायपास रोड पर बढ़ता अतिक्रमण, प्रशासन मौन” शीर्षक से एक समाचार प्रकाशित हुआ।
इस खबर में संपादक श्री सलूजा ने कोरबा के बायपास रोड पर फैले कबाड़ कारोबार और अतिक्रमण की स्थिति पर सवाल उठाए थे। हालांकि, खबर में किसी भी कबाड़ी संचालक या व्यवसायिक प्रतिष्ठान का नाम उल्लेखित नहीं किया गया था।
व्यवसायी का पलटवार — झूठी शिकायत से माहौल गरमाया
खबर प्रकाशित होने के कुछ ही दिनों बाद, ओम प्रकाश राम बादल, जो कि कबाड़ी खरीद–बिक्री का कार्य करते हैं, ने पत्रकार के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय एवं मानिकपुर चौकी में आवेदन दिया।
उनका आरोप है कि पत्रकार ने उनसे पैसे की मांग की और डिजिटल भुगतान (फोनपे) के माध्यम से रिश्वत लेने का प्रयास किया।
पत्रकार ने किया साजिश का खुलासा
इस मामले में SN इंडिया न्यूज़ के प्रमुख संपादक योगेश सलूजा ने बताया कि यह पूरा घटनाक्रम उन्हें बदनाम करने की साजिश है।
उन्होंने कहा —
“मैंने केवल एक जनहित समाचार प्रकाशित किया था जिसमें किसी व्यक्ति या व्यवसाय का नाम नहीं लिया गया था। लेकिन खबर से नाराज़ कुछ लोगों ने मेरे खिलाफ झूठे आरोप लगाकर मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।”
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
श्री सलूजा ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित आवेदन देकर अनुरोध किया है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और झूठे आरोप लगाने वालों पर उचित वैधानिक कार्रवाई की जा सके।
स्थानीय पत्रकार संगठन ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि —
“पत्रकारों को डराने या फँसाने की कोशिश अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रहार है। यदि प्रशासन ऐसे मामलों पर सख्त कदम नहीं उठाएगा, तो यह पत्रकारिता के लिए खतरा साबित होगा।”
इस प्रकरण ने कोरबा जिले में मीडिया जगत और व्यापारिक वर्ग के बीच नई बहस को जन्म दे दिया है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या जनहित की खबर प्रकाशित करने पर पत्रकारों को झूठे मामलों में फँसाने की कोशिश की जा रही है?
अब सबकी निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं — जिससे यह तय होगा कि सच्चाई किस पक्ष में है




