कोरबा। ग्राम पंचायत साजापानी में वर्ष 2019 में जिला खनिज न्यास मद से सड़क निर्माण कराया गया था। आरोप है कि इस सड़क निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार हुआ, जिससे सड़क कुछ ही महीनों में टूटकर खराब हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग ₹5 लाख की लागत से बनी यह सड़क अब बदहाल स्थिति में है और आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो चुका है।
छत्तीसगढ़ मानव अधिकार संगठन के राज्य सचिव शिवचरन चौहान ने इस मामले में जिलाधीश कोरबा को पत्र भेजकर जांच की मांग की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि पंचायत एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा सड़क निर्माण में लापरवाही और भ्रष्टाचार किया गया। सड़क निर्माण के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके कारण सड़क उखड़ चुकी है और कीचड़ भरी हो गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के बाद से अब तक न तो मरम्मत हुई और न ही गुणवत्ता की जांच। बरसात के दिनों में यह सड़क दलदल में बदल गई, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, महिलाओं, मरीजों और आमजन को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मानव अधिकार संगठन ने प्रशासन से तत्काल तकनीकी जांच कर दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि सरकारी राशि की बर्बादी रोकी जा सके और ग्रामीणों को राहत मिल सके।
📌 मुख्य बिंदु:
वर्ष 2019 में बना सड़क निर्माण कार्य चौथे ही साल बदहाल
₹5 लाख की राशि खर्च होने के बावजूद सड़क उखड़ गई
ग्रामीणों को भारी असुविधा, प्रशासन मौन
मानव अधिकार संगठन का जिला कलेक्टर को जांच की मांग वाला पत्र
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक कार्रवाई करता है। SN इंडिया न्यूज से जितेन्द्र दास कि खब




