कोरबा/पाली:- कोरबा जिले के सरपंच जिनके कंधे पर गांव के विकास की जिम्मेदारी है, आज वे स्वयं ही परेशान है। मसला है पंचायत फंड का, क्योंकि उन्हें सरपंच का पद तो मिला है लेकिन उनके निर्वाचित होने के 9 माह बाद भी पंचायत फंड नही मिली, जिससे वे गांव का विकास कर सके। इस समस्या से परेशान पाली जनपद के सरपंचों ने सामूहिक इस्तीफा का निर्णय लिया है।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025- 26 गत सम्पन्न होने के 9 माह बाद भी पंचायतों को मिलने वाले मूलभूत और टाइड- अनटाइड फंड नही मिलने से निर्वाचित सरपंच काफी परेशान है। आलम यह है कि गांव की गलियां, सड़के, पानी और बिजली सहित अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं बेजान पड़ी हुई है। कई पुरानी योजनाओं का भी भुगतान नही हो पा रहा है। पाली जनपद अंतर्गत सरपंचों ने बताया कि गांव में मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए भी उनके पास कोई फंड नही है और वे खुद को डिफॉल्टर बता रहे है। उनका कहना है कि आखिर ऐसे में कैसे गांव का विकास हो पाएगा, वहीं काम तो दूर की बात मूलभूत समस्याओं को दूर करने एक फूटी कौड़ी भी शासन- प्रशासन से 9 माह बाद भी नही मिली है। परेशान सरपंचों ने आपबीती बताते हुए कहा कि एक सरपंच की जो छवि होती है, वह अब डिफॉल्टर के रूप में वेंडर के समक्ष बनने लगी है, क्योंकि मूलभूत और 15वें वित्त की राशि अबतक सरपंचों को नही डाली गई है। जिसके कारण छोटे- छोटे काम के लिए हमे दुकानदारों पर निर्भर रहना पड़ रहा है और समय पर भुगतान न कर पाने की वजह से हमे उनके सामने बेइज्जत होना पड़ रहा है। जनता हमे चुनकर लाई है और फंड की कमी से विकास न कर पाने के कारण जनता का विश्वास भी हमसे उठते जा रहा है। भाजपा समर्थित सरपंच भी सरकार को कोस रहे है और उनका कहना है कि आज विष्णुदेव साय के सरकार में ठगा महसूस कर रहे है। भाजपा सरकार में लोगों को काफी उम्मीदें थी कि गांवों में अपेक्षित विकास होगा, लेकिन सरकार गांव के विकास को संज्ञान में नही ले रही है, जिसके कारण गांव का विकास थम गया है। प्रदेश के लिए यह बड़े ही दुर्भाग्य का विषय है, जिसे देखते हुए पाली जनपद के सरपंचों ने सामूहिक इस्तीफा कलेक्टर को देने का फैसला लिया है


