स्थित चारपारा धान मंडी में अव्यवस्थाओं से त्रस्त किसान, राइस मिलरों पर उठे सवाल
धान खरीदी को लेकर पहले से ही टोकन व्यवस्था की मार झेल रहे किसानों की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। चारपारा धान मंडी में इन दिनों कटे-फटे और घटिया गुणवत्ता वाले बारदाने (बोरे) किसानों के लिए नई मुसीबत बन गए हैं। किसानों का कहना है कि इन बोरो में धान भरना बेहद मुश्किल हो रहा है, जिससे न केवल समय बर्बाद हो रहा है बल्कि धान खराब होने का भी खतरा बना रहता है।
25 रुपये प्रति बारदाना देने के बावजूद घटिया बोरे क्यों?
किसानों ने नाराज़गी जाहिर करते हुए बताया कि शासन द्वारा राइस मिलरों को प्रति बारदाना 25 रुपये का भुगतान किया जाता है, इसके बावजूद मंडी में सप्लाई किए जा रहे बोरे काटे-फटे, कमजोर और अनुपयोगी हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब भुगतान पूरा किया जा रहा है, तो किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बारदाने क्यों नहीं दिए जा रहे?
किसानों का आरोप है कि राइस मिलर जानबूझकर पुराने और खराब बारदाने खपा रहे हैं, ताकि लागत बचाई जा सके, जबकि इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है।
धान भरते समय हो रही भारी परेशानी
मंडी में मौजूद किसानों ने बताया कि कटे-फटे बारदानों में धान भरते समय बोरे फट जाते हैं, जिससे धान जमीन पर गिर जाता है। कई बार दोबारा सफाई करनी पड़ती है। इससे न केवल अतिरिक्त मेहनत बढ़ जाती है, बल्कि किसान मानसिक रूप से भी परेशान हो रहे हैं।
एक किसान ने बताया,
“कई बोरे तो ऐसे हैं कि उठाते ही नीचे से फट जाते हैं। ऐसे में धान भरना तो दूर, उन्हें संभालना भी मुश्किल हो जाता है।”
टोकन व्यवस्था पहले से ही किसानों की कमर तोड़ रही
किसानों की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। उन्होंने बताया कि धान बेचने के लिए टोकन मिलने में 20 से 25 दिन तक इंतजार करना पड़ता है। इतने लंबे इंतजार के बाद जब किसान मंडी पहुंचते हैं, तो वहां उन्हें घटिया बारदाने थमा दिए जाते हैं। इससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
किसानों का कहना है कि घर पर रखा धान बारिश और नमी के कारण खराब होने का डर रहता है, ऊपर से मंडी पहुंचने के बाद इस तरह की अव्यवस्था सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
चारपारा धान मंडी में यह समस्या कोई नई नहीं है, इसके बावजूद मंडी प्रबंधन और संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। किसानों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी मौके पर निरीक्षण नहीं कर रहे हैं और न ही राइस मिलरों पर कोई दबाव बनाया जा रहा है।
किसानों की मांग
किसानों ने शासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि:
मंडी में अच्छी गुणवत्ता के नए और मजबूत बारदाने उपलब्ध कराए जाएं
राइस मिलरों द्वारा दिए जा रहे बारदानों की जांच और निगरानी की जाए
टोकन व्यवस्था को सरल और तेज़ बनाया जाए
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन किसानों की इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेता है, या फिर किसान इसी तरह अव्यवस्थाओं के बीच पिसते रहेंगे।


