कोरबा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत भले ही दावा-आपत्ति की समय-सीमा समाप्त हो गई है, पर बीएलओ अब भी मतदाताओं के दस्तावेज ढूंढ रहे हैं। दूसरी ओर बीएलओ पोर्टल में जिन मतदाताओं के दस्तावेज में अंतर है, उनका नोटिस दिखने लगा है। इस वजह से बीएलओ सत्यापन का काम भी कर रहे हैं।
जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण के समय 9 लाख 51 हजार 278 मतदाता थे। गणना पत्रक जमा करने के आधार पर प्रारंभिक प्रकाशन किया गया। इसमें 8 लाख 17 हजार 419 मतदाता बच गए हैं। 1 लाख 33 हजार 741 मतदाताओं के नाम काटे गए। नो मैपिंग के तहत 40 हजार 882 मतदाताओं को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया था।
इन मतदाताओं का नाम सी कैटेगरी में रखा है, लेकिन करीब 20 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के दस्तावेज जमा नहीं हुए। इस वजह से बीएलओ को मतदाताओं को ढूंढकर दस्तावेज जमा करना पड़ रहा है। बीएलओ के साथ ही एईआरओ दस्तावेज को ऑनलाइन अपलोड कर रहे हैं। अब ऐसे मतदाताओं को भी ढूंढा जा रहा है, जिन्होंने अपने रिश्तेदारों का रिफरेंस में नाम दिया है।
वर्ष 2003 की सूची में जिनका नाम नहीं है, उन मतदाताओं को ही दस्तावेज बताने में परेशानी हो रही है। यही नहीं, वर्ष 2003 में नाम के साथ सरनेम नहीं जुड़ा था, लेकिन अभी के मतदाता सूची में सरनेम भी जुड़ गया है। बीएलओ को सत्यापन कर यह बताना पड़ रहा है कि यह वही मतदाता हैं। सत्यापन की प्रक्रिया 14 फरवरी तक चलेगी। इसके बाद 21 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। अभी भी कई मतदाता अपना दस्तावेज लेकर तहसील भी पहुंच रहे हैं। उप जिला निर्वाचन अधिकारी माधुरी सोम ठाकुर का कहना है कि बीएलओ सत्यापन करने के साथ ही अपलोड भी कर रहे हैं।



