बसंत मंझवार, रामअवतार बैगा और संतराम कोरवा। तीनों देवद्वारी गांव के प्रायमरी स्कूल में शिक्षक हैं। यहां 21 बच्चे पढ़ते हैं और सभी बिरहोर और मंझवार जनजाति के हैं। पढ़ाने के लिए इस स्कूल तक पहुंचना आसान नहीं है। शिक्षक प्रतिदिन डोंगी से पहले गदगदा नाला पार करते हैं, फिर एक किलोमीटर कठिन चढ़ाई चढ़ते हैं और तब जाकर स्कूल पहुंचते हैं।
यह इनका रोज का काम है। ऐसी स्थिति एक या दो दिन नहीं लगभग छह महीने बनी रहती है। जिला मुख्यालय कोरबा से लगभग 50 किमी दूर ग्राम पंचायत देवपहरी के आश्रित गांव देवद्वारी पहाड़ी के ऊपर बसा है। इस गांव तक जाने के लिए ना तो सड़क है और ना ही नाले पर पुल बन सका है। बांगो बांध का डूबान क्षेत्र होने से नाले का जलस्तर भी ज्यादा होता है। गदगदा नाला बारहमासी है।
लेमरू मार्ग पर गढ़ उपरोड़ा से 3 किलोमीटर आगे से कच्ची सड़क है। मुख्य मार्ग से नाले की दूरी डेढ़ किलोमीटर है। बारिश के समय नाले का जलस्तर 12 से 15 फीट तक बढ़ जाता है। जनवरी के बाद ही यह कम होता है। रामअवतार बताते हैं कि पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए हम सभी शिक्षक नाले को जान जोखिम में डालकर पार करते हैंं और स्कूल तक पहुंचने के लिए चढ़ाई करते हैं।



