SN इंडिया न्यूज
छत्तीसगढ़ की ऊर्जाधानी कोरबा में इन दिनों प्रबंधन की सांठगांठ से लापरवाही का ऐसा अंधेरगर्दी चल रहा है,जो कभी भी बड़ी तबाही की वजह बन सकता है। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह DSPMTPS सीएसईबी चौक के सामने तमाम सुरक्षा कायदों और रेलवे के कड़े नियमों को बंधक बनाकर मंगल इंजीनियरिंग के रसूखदार ठेकेदार मुकेश राजपूत ने सरकारी जमीन पर अपना अवैध पक्का ऑफिस नुमा मकान खड़ा कर लिया है। सूत्रों की माने तो रेलवे ट्रैक और सिग्नल केबिन के ठीक बगल में बने इस आलीशान अवैध केबिन में बकायदा एसी AC लगाकर इसे ऐशगाह में तब्दील कर दिया गया है, जहाँ आए दिन शराब की महफिलें सज रही हैं।
लापरवाही की हद मौत के साए में मंगल इंजीनियरिंग का अवैध ऑफिस ठेकेदार मुकेश राजपूत की यह मनमानी सिर्फ एक अतिक्रमण नहीं है बल्कि सैकड़ों जिंदगियों के साथ खिलवाड़ है। इस अवैध निर्माण के ठीक ऊपर से हाईटेंशन विद्युत लाइन गुजर रही है। नियमों के मुताबिक ऐसी जगहों पर परिंदा भी पर नहीं मार सकता लेकिन यहाँ
ठेकेदार ने पक्के मकान पर लोहे का टीन शेड ठोक दिया है जो बिजली का सबसे बड़ा सुचालक है।
हवा में तैरता यह करंट मामूली शॉर्ट सर्किट से इस टीन शेड के जरिए पूरे इलाके में मौत का तांडव मचा सकता है। इसके बावजूद, सीएसईबी और रेलवे का सुरक्षा अमला आंखें मूंदकर इस लापरवाही के नंगे नाच को मूकदर्शक बनकर देख रहा है।
रेलवे के 30 मीटर वाले सख्त नियम और सुरक्षा मापदंडों का कत्लेआम जी हाँ रेलवे और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण CEA के नियमों की इस कदर धज्जियां उड़ाई गई हैं कि कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अब जवाब देने की हालत मे नहीं है l
नियमतः रेलवे बाउंड्री का 30 मीटर का कड़ा नियम है,रेलवे एक्ट के मुताबिक रेलवे ट्रैक के सेंटर लाइन से 30 मीटर के दायरे में या रेलवे की सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का पक्का या कच्चा निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। ठेकेदार ने बिना किसी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट NOC के सिग्नल केबिन के पास यह कब्जा किया है। जो लोको पायलट की विजिबिलिटी से खिलवाड़ है, सिग्नल केबिन के पास किसी भी निर्माण की मनाही होती है क्योंकि इससे ट्रेनों का संचालन करने वाले लोको पायलटों को सिग्नल देखने में बाधा आती है। यह कृत्य सीधे तौर पर रेल दुर्घटना की साजिश जैसा है।
CEA का वर्टिकल क्लीयरेंस नियम के अनुसार हाईटेंशन लाइनों के नीचे किसी भी पक्की छत या मानवीय गतिविधि पर सख्त पाबंदी है। ठेकेदार मुकेश राजपूत ने इन सभी नियमों को अपनी जेब में रखकर इस अवैध निर्माण को अंजाम दिया है।
लेकिन सवाल यह है आखिर प्रबंधन मौन क्यों? क्या रसूख के आगे नतमस्तक हैं अफसर?
क्या सीएसईबी के उपक्रमों और करोड़ों की जमीनों की सुरक्षा का दम भरने वाले बड़े अधिकारियों को यह अवैध निर्माण क्यों नहीं दिखा?
एक ठेकेदार मंगल इंजीनियरिंग फर्म के बैनर तले प्लांट के भीतर काम करने वाले एक ठेकेदार की इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि वह कानून की परिभाषा को ही बदल दे? सूत्रों का कहना है कि इस अवैध ठिकाने पर होने वाली शराब पार्टियों में कुछ सफेदपोशों और विभागीय अधिकारियों का भी संरक्षण प्राप्त है यही वजह है कि आज तक इस पर कोई हथौड़ा नहीं चला।
रेलवे ट्रैक और मौत के तार हाईटेंशन लाइन के नीचे बने इस अवैध निर्माण को तुरंत जमींदोज किया जाना आवश्यक है साथ ही रेलवे सुरक्षा अधिनियम और विद्युत चोरी,अवैध कब्जे की धाराओं के तहत ठेकेदार मुकेश राजपूत पर तत्काल कार्रवाई करते हुए फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की आवश्यकता है ताकि नियमों का मखौल उड़ाने वाली मंगल इंजीनियरिंग फर्म को कानूनी कार्रवाई की परिभाषा का मतलब भी पता चल सके।
ऊर्जाधानी में चल रहा लापरवाही का यह तमाशा कब बंद होगा और प्रशासन इस रसूखदार ठेकेदार के अवैध साम्राज्य पर कब बुलडोजर चलाएगा इस पर अब पूरे कोरबा की नजरें टिकी हुई हैं।






