कटघोरा में शनिवार का दिन कानून व्यवस्था के लिए चुनौती भरा साबित हुआ, जब पास्टर बजरंग जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय मसीही समुदाय बड़ी संख्या में थाने के बाहर इकट्ठा हो गया। गिरफ्तारी से आक्रोशित समुदाय ने पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई में पक्षपात का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते भीड़ का आकार बढ़ता गया और थाने के बाहर तनावपूर्ण माहौल बन गया।
पास्टर की गिरफ्तारी से भड़का समुदाय:
बताया जाता है कि पास्टर बजरंग जायसवाल को किसी विवादित मामले को लेकर पुलिस ने हिरासत में लिया था। यह खबर क्षेत्र में आग की तरह फैली और कुछ ही देर में मसीही समाज के लोग कटघोरा थाने में जमा होने लगे। कई महिलाएं, बुजुर्ग और युवा—सभी पास्टर की गिरफ्तारी को अनुचित बताते हुए प्रदर्शन में शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि चर्च का विरोध करने वाले व्यक्तियों पर तुरंत FIR दर्ज की जाए, जिन्हें वे पूरे विवाद की जड़ मान रहे थे।
पुलिस की समझाइश के बावजूद नहीं माने प्रदर्शनकारी:
हालात बिगड़ते देख पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को शांत कराने की कोशिश की। प्रशासन ने प्रतिनिधियों से आवेदन लेने की बात कही, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे और स्पष्ट कर दिया कि जब तक FIR दर्ज नहीं होती, वे थाने परिसर से हटने वाले नहीं हैं।
करीब दो घंटे से अधिक समय तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। भीड़ बढ़ने और नाराज़गी तीखी होने पर पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज, माहौल हुआ शांत:
आखिरकार, बढ़ते दबाव और संभावित कानून-व्यवस्था के संकट को देखते हुए कटघोरा पुलिस ने पार्षद हरीश यादव और उनके कथित सहयोगियों आशा यादव, श्यामा सोनी और सविता रजक के खिलाफ FIR दर्ज की। इसके बाद धीरे-धीरे भीड़ शांत होने लगी और प्रदर्शनकारियों ने थाने परिसर छोड़ दिया।
थाना प्रभारी के अनुसार, “स्थिति अब नियंत्रण में है और दोनों पक्षों की शिकायतों पर विधि अनुसार कार्रवाई की जा रही है।”
वहीं दूसरी ओर, पार्षद और उनके समर्थकों ने आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि वे भी अपनी ओर से तथ्य पुलिस के सामने रखेंगे।
मसीही संगठन के अध्यक्ष श्री विजय मेश्राम ने कहा कि- पास्टर जायसवाल को झूठे मामले में फसाया गया है हम न्याय की लड़ाई आगे भी लड़ेंगे। भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 के अनुसार, सभी को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है, जिसका अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अपने धर्म का पालन, आचरण, और प्रचार कर सकता है। लेकिन यहां हमलावरों को छूट दे दी गई है और हमारे बेकसूर धर्म गुरुओं को गिरफ्तार किया जा रहा है। यदि पुलिस द्वारा उचित कार्यवाही नहीं की गई तो हम न्यायालय की लड़ाई के लिए भी तैयार हैं।
कटघोरा में धार्मिक तनाव की आहट:
इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक तनाव को उजागर कर दिया है। स्थानीय नागरिकों में आशंका है कि यदि सभी पक्षों के बीच संवाद नहीं हुआ तो स्थिति आगे और जटिल हो सकती है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों पर नजर बनाए हुए है और मामले की जांच जारी है।




