डमरूआ /रायगढ़। जिले में पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह की अपराध और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति की चर्चा लगातार हो रही है। बड़े-बड़े मामलों में कार्रवाई ने आम लोगों के बीच यह भरोसा भी जगाया कि अब पुलिसिंग केवल वर्दी नहीं बल्कि व्यवस्था सुधार का माध्यम बनेगी। लेकिन घरघोड़ा क्षेत्र से सामने आई चर्चाओं ने इस नीति पर ऐसा कोयला पोत दिया है कि अब लोग पूछ रहे हैं — जीरो टॉलरेंस जमीन पर है या केवल भाषणों में।
कोयले की काली कमाई का पुराना खेल फिर गर्म
घरघोड़ा क्षेत्र में एक बार फिर अवैध कोयले के कारोबार की चर्चाएं तेज हैं। इलाके के जानकार बताते हैं कि खेतों, नदी-नालों और आसपास के क्षेत्रों से निकले अवैध कोयले का कारोबार पहले भी खूब फल-फूल चुका है। कोल तस्करों का कथित नेटवर्क तैयार रहता है, जिसमें खनन से लेकर उद्योगों तक सप्लाई की पूरी व्यवस्था शामिल रहती है। अब चर्चा है कि वही पुराना धंधा फिर से पटरी पर लौट आया है।सूत्र बताते हैं कि एसईसीएल की बिजारी ओपन कास्ट माइंस से भी कोयला चोरी कर आसपास के ईंट भट्टों और छोटे उद्योगों तक पहुंचाने का खेल जारी है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि इतना सब कुछ हो रहा है तो जिम्मेदार आंखें आखिर बंद क्यों हैं।
ट्रैक्टर पकड़ा गया, अपराध नहीं
कार्रवाई ऐसी कि केस रास्ते में ही गायब हो गया
बताया जा रहा है कि तीन दिन पहले पतेरापाली टेरम के पास अवैध कोयले से लोड एक ट्रैक्टर को पकड़ा गया था। चर्चा है कि घरघोड़ा थाना के आरक्षक पारसमणी बेहरा ने ट्रैक्टर को रोका भी, लेकिन मामला अपराध दर्ज होने तक पहुंचा ही नहीं। स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक ट्रैक्टर को छोड़ने के पीछे डेढ़ लाख रुपए के व्यवहार की कहानी घूम रही है। कहा जा रहा है कि रकम ऐसी चली कि अपराध का नामोनिशान ही मिट गया।
जब इस संबंध में थाना प्रभारी साहू से चर्चा की गई तो उन्होंने साफ कहा कि अवैध कोयले की कोई धरपकड़ नहीं हुई। दूसरी ओर आरक्षक पारसमणी बेहरा ने कहा कि कुछ लोग बोरियों में कोयला भरकर ला रहे थे, जिन्हें पकड़कर बाद में छोड़ दिया गया।अब सवाल यह है कि जब थाना प्रभारी कह रहे हैं कि कोई कार्रवाई हुई ही नहीं, तो फिर पकड़ने और छोड़ने की







