कोरबा:- पंचायतों के कामों में पारदर्शिता लाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित जियोटैग पोर्टल पर जिले के पोड़ी उपरोड़ा व पाली जनपद पंचायत में पर्दा डालने का खेल किया जा रहा है। जहां टाइड- अनटाइड की राशि से ग्राम पंचायतों में कराए गए कार्यों का विवरण देने के बजाय पोर्टल पर सिर्फ पेमेंट दर्ज किया जा रहा है। नतीजतन आम जनता को यह पता ही नही चल पा रहा कि गांव में आखिर काम क्या- क्या हुआ? ऐसे में जब पोर्टल पर काम का नाम ही उल्लेख नही होगा तो जनता सवाल किससे पूछेगी? इस फार्मूले से सरकार की पारदर्शिता मंशा पर ग्रहण लग रहा है और पंचायतों में भ्रष्ट्राचार की आशंका गहरा गई है।
पंचायती राज मंत्रालय के निर्देशानुसार ग्राम पंचायतों में टाइड- अनटाइड के हर कार्य का जनपद पंचायत कार्यालय द्वारा जियोटैग पोर्टल पर लागत, फोटो, स्थान, कार्य का नाम के साथ पूरा विवरण अपलोड करना जरूरी है, ताकि भौतिक सत्यापन हो सके। लेकिन जिले के पोड़ी उपरोड़ा और पाली जनपद पंचायत में इसकी खानापूर्ति हो रही है। स्थिति यह है कि केंद्र के पंचायती राज मंत्रालय और राज्य सरकार के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए भ्रष्ट्राचार की संभावना बढ़ गई है। यानी काम क्या हुआ, कहां हुआ- कुछ पता नही। सिर्फ नंबर और राशि तथा काम विवरण में “पेमेंट” दर्शाकर कार्य को छिपाया जा रहा है। ऑनलाइन जियोटैग पोर्टल का मकसद कि आम नागरिक आसानी से देख सकें की उनके पंचायत में टाइड- अनटाइड की राशि से कौन- कौन से बुनियादी काम हुए और कितना पैसा खर्च हुआ। लेकिन जनपद पंचायतों द्वारा केवल पेमेंट अपडेट करने से आम जनता अंधेरे में हैं और उन्हें पता नही कि उनके पंचायत में कहां पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की गई, नाली- सीसी रोड बनी, रोशनी व्यवस्था दुरुस्त की गई, स्वच्छता संबंधित कार्य हुए और क्या- क्या मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति की गई। वहीं कटघोरा, कोरबा व करतला जनपद अंतर्गत पंचायतों में टाइड- अनटाइड के कामों का उल्लेख जियोटैग पोर्टल पर तो है लेकिन कार्य स्थल नही बताया गया है। सांसद, विधायक और अन्य मद/ योजना के कामों को तो जिले के पांचों जनपदों में पोर्टल पर अपलोड नही किया गया है। ऐसे में ग्राम सभा मे लोग हिसाब नही मांग पा रहे, क्योंकि रिकॉर्ड में काम का उल्लेख ही नही और यदि काम का उल्लेख है तो कार्य स्थान गायब हैं। टाइड- अनटाइड का पैसा जनता का पैसा है। ऐसे में पारदर्शिता के लिए बना जियोटैग पोर्टल जैसी तकनीक होने के बावजूद काम का विवरण के स्थान पर महज पेमेंट दिखाया जाए तो यह तकनीकी गलती नही, जानबूझकर किया गया भ्रष्ट्राचार है। शासन- प्रशासन को इस ओर तुरंत संज्ञान लेकर विस्तृत जानकारी अपलोड करवानी चाहिए और अधूरा डेटा अपलोड करने वाले दोषियों पर कार्रवाई के साथ उक्त मद के कार्यों का भौतिक सत्यापन कराई जाए। जिससे इस “पेमेंट” घोटाले पर रोक लग सके।


