हैदराबाद | SN इंडिया न्यूज। हैदराबाद के गोलकोंडा इलाके से कथित फर्जी डॉक्टर का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने 23 वर्षीय अदनान को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक अदनान ने सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई की है, इसके बावजूद वह खुद को डॉक्टर और खानदानी हकीम बताकर मरीजों का इलाज कर रहा था।
आरोप है कि अदनान ‘हिकमा सेहत केयर सेंटर’ नाम से सेंटर चला रहा था, जहां यौन स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों के अलावा सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, किडनी और कमर दर्द तथा पेशाब संबंधी समस्याओं से परेशान मरीज उपचार के लिए पहुंचते थे।
पहले सहायक था, फिर मरीजों का इलाज करने लगा
पुलिस के अनुसार अदनान ने वर्ष 2023 में सेंटर पर सहायक के तौर पर काम शुरू किया था। इसी दौरान उसकी मुलाकात BUMS डॉक्टर मुनव्वर बेगम से हुई। पुलिस का दावा है कि बाद में डॉक्टर के साथ कथित तौर पर 13 हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान का समझौता हुआ। आरोप है कि डॉक्टर की गैरमौजूदगी में अदनान और उसके परिवार के सदस्य मरीजों को देखते थे।
मां और भाई पर भी पुलिस का शिकंजा
इस मामले में अदनान की मां सबा खान उर्फ मोहम्मदी बेगम और भाई मोहम्मद फैजान को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस का आरोप है कि तीनों खुद को खानदानी हकीम बताकर मरीजों का उपचार करते थे और दवाएं देने के साथ कथित तौर पर प्रिस्क्रिप्शन भी लिखते थे।
क्लिनिक की तलाशी में क्या मिला?
पुलिस ने सेंटर की जांच के दौरान बड़ी संख्या में बोतलें, पाउडर, दवाओं के पैकेट और प्रिस्क्रिप्शन बुक बरामद करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक कुछ दवाओं पर उचित लेबल नहीं थे और उनकी पहचान के लिए बोतलों व पैकेट पर मार्कर से नाम या कोड लिखे गए थे।
इसके अलावा ‘Doctor Adnan Official’ नाम के फेसबुक पेज से जुड़ी पांच किताबें भी बरामद किए जाने की बात पुलिस ने कही है।
सोशल मीडिया से मरीज जुटाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक सेंटर के प्रचार के लिए सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल किया जाता था। फेसबुक और इंस्टाग्राम सहित अन्य माध्यमों पर कथित प्रचार सामग्री के जरिए मरीजों को सेंटर तक लाने का आरोप है।
आरोपी गिरफ्तार, दो की तलाश जारी
गोलकोंडा पुलिस ने अदनान को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसकी मां सबा खान और भाई मोहम्मद फैजान फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर सेंटर से जब्त दवाओं और अन्य सामग्री की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सेंटर पर इस्तेमाल की जा रही दवाओं की वास्तविक प्रकृति क्या थी और कितने समय से बिना आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता के मरीजों का उपचार किया जा रहा था।



