पाली – नगर में गणेश उत्सव के अंतिम दिन आस्था और नियम दोनों को तार-तार कर दिया गया। हाईस्कूल के समीप स्थापित “पाली का राजा” गणेश प्रतिमा का आज विधि-विधान से हवन कर विसर्जन किया जाना था, लेकिन आयोजकों ने नियम-कानून को ताक पर रखकर विसर्जन को डीजे के कानफोड़ू शोर में बदल दिया।
नियमानुसार विसर्जन शांतिपूर्ण और गरिमामय तरीके से होना था, लेकिन मौके पर तेज आवाज में डीजे बजाकर पूरे नगर में ध्वनि प्रदूषण फैलाया जा रहा है।
बीमार बुजुर्गों की बढ़ी तकलीफ, बच्चे सहमे
इस तेज शोर से सबसे ज्यादा परेशानी नगर के आम लोगों को हो रही है। घरों में आराम कर रहे बीमार बुजुर्ग इस कर्कश आवाज से असहजता महसूस कर रहे हैं, वहीं डेढ़-दो साल के छोटे बच्चे डीजे की तेज धमक से चमककर रो रहे हैं।
सवाल यह है कि जब सुप्रीम कोर्ट और जिला प्रशासन द्वारा ध्वनि प्रदूषण और डीजे को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी की गई है, तो पाली में इसका पालन क्यों नहीं कराया जा रहा है? क्या आयोजकों के लिए प्रशासन के नियम मायने नहीं रखते? स्थानीय पुलिस भी इस मामले में कोमा बैठी है, क्या किसी राजनेता का दबाव है या कोई प्रभावी का दमखम है जो पुलिस शांत बैठी है? स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे आयोजनों में ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाए, ताकि आस्था के नाम पर आम जनता की सेहत से खिलवाड़ न हो।



