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कोरबा/कटघोरा:- जनपद पंचायत कटघोरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत मोहनपुर में पदस्थ सचिव रहीम अली ने पंचायत में भ्रष्ट्राचार कर बहुत ही कम समय मे इतना पैसा कमाया कि आज वह लाखों बल्कि करोड़ो का आसामी बन गया है। पोड़ी उपरोड़ा ब्लाक के एक छोटे से गांव मल्दा में निवास करने वाले सचिव रहीम देखते ही देखते खटारी मोटर साइकिल से सीधे कार तक जा पहुँचा और करीब 40 लाख का मकान सहित तमाम ऐशोआराम की चीजें जुटा ली तथा चंद ही सालों में उसने करोड़ो का साम्राज्य खड़ा कर लिया। सचिव का पैतृक आवास दो मंजिला हवेली है। जिसमे आधुनिक इंटीरियल, महंगी स्टील, बड़ी बालकनी और बेशकीमती फर्नीचर लगा हुआ है। मल्दा गांव के लोग बताते है कि सचिव रहीम अली के पास खुद का एक कच्चा मकान था। लेकिन चार से पांच वर्ष पूर्व जब उनका कच्चा मकान तोड़कर पक्का मकान बनाया जा रहा था तब लगा कि सामान्य मकान बनाया जाएगा। लेकिन दो मंजिला बंगला खड़ा किया गया साथ ही एक कार भी खरीद ली। वर्तमान सचिव मोटर साइकिल की सवारी कम और कार की ज्यादा करता है। तब सबको समझ आ गया कि ये सभी मुट्ठी भर सरकारी तनख्वाह से नही बल्कि कुछ और ही कमाई से खड़ा किया गया है। सचिव रहीम अली पूर्व में पोड़ी उपरोड़ा जनपद अंतर्गत कई ग्राम पंचायतों में पदस्थ रह चुका है। इस दौरान उन्होंने मनमाने भ्रष्ट्राचार को अंजाम दिया है। वहीं वर्तमान में कटघोरा जनपद के ग्राम पंचायत मोहनपुर में पदस्थ रहते हुए यहां भी अपने भ्रष्ट्र कार्यप्रणाली और सरपंच से सांठगांठ करके सरकारी धन का खूब वारा- न्यारा किया गया है, जो आसपास क्षेत्र में चर्चा का विषय है। इनके मनमानी और व्याप्त भ्रष्ट्राचार को लेकर ग्रामीण शिकायतें करते रहे, वहीं अधिकारियों के रहमत- कृपा से ग्राम सचिव रहीम अली बचते रहे है। सचिव- सरपंच के मिलीभगत से मोहनपुर पंचायत खाते के मूलभूत मद और 14वें, 15वें वित्त आयोग की राशि मे बीते पंचवर्षीय कार्यकाल में लाखों के भ्रष्ट्राचार का आरोप है। जिसमे गांव के विकास के लिए 24- 25 लाख रुपए का कार्य कागजों में तो दिखाया गया है, लेकिन धरातल पर सबकुछ नदारद है। जहां पुराने कामों को भी कागजों में नया दिखाकर अलग से भ्रष्ट्र कृत्य को अंजाम दिया गया है। जिसे खबरों के माध्यम से संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया तब जनपद सीईओ यशपाल सिंह ने बीते एक माह पूर्व जिसकी जांच हेतु टीम का गठन किया, किन्तु टीम आज पर्यन्त जांच के लिए गांव नही पहुँच पायी है। जांच टीम को मोहनपुर पहुँचने में और कितना दिन, हप्ता अथवा महीना लगेगा इसका अनुमान तो नही लगाया जा सकता, किन्तु भ्रष्ट्राचार में लिप्त सरपंच- सचिव के विरुद्ध जांच कार्यवाही के नाम पर इस तरह का संरक्षण दिया जाना भ्रष्ट्राचार को बढ़ावा देना है। इससे दोषियों को लीपापोती कर बचने का पर्याप्त मौका मिल गया है। बहरहाल विधायक प्रतिनिधि शुभम सिंह राजपूत द्वारा सरपंच- सचिव के भ्रष्ट्राचार को लेकर कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और उचित कार्यवाही किये जाने मांग की गई है। इससे दोषियों में बेचैनी बढ़ गई है और वे अपने बचाव की जुगत में जुट गए हैं। फिलहाल पंचायत में भ्रष्ट्राचार का तांडव मचाते हुए सचिव रहीम अली द्वारा अल्प समय मे आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले पर भी जिला प्रशासन को संज्ञान लेना चाहिए।
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