कहते हैं सड़कें विकास का रास्ता तय करती हैं, लेकिन हमारे जिले के वार्ड क्रमांक 20, पथर्री पारा में विकास का नहीं, बल्कि अधिकारियों और ठेकेदारों की अंधाधुंध कमाई’ का रास्ता साफ हुआ है। यहाँ बनी नई नवेली सड़क को देखकर स्थानीय लोग आक्रोशित हैं और उनका साफ कहना है यह सड़क लोगों के चलने के लिए नहीं, बल्कि साहब लोगों की जेबें भरने के लिए बनाई गई है
गुणवत्ता ‘लापता’ इंजीनियर ‘मौन’ और ठेकेदार ‘मस्त
योजना तो बड़ी शान से बनाई गई थी कि सड़क का चौड़ीकरण किया जाएगा ताकि जनता को आवागमन में सुविधा हो। ठेका दे दिया गया बजट पास हो गया और काम भी शुरू हो गया। लेकिन धरातल पर जो खेल खेला गया, उसे देखकर किसी का भी सिर चकरा जाए।
सड़क निर्माण में गुणवत्ता (Quality) का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। गिट्टी और डामर का ऐसा अनोखा’ संगम किया गया है जो पहली बारिश तो क्या गाड़ियों के दो-चार चक्करों में ही उखड़ना शुरू हो जाए।
बड़ा सवाल जब ठेकेदार सरेआम जनता के पैसों की धज्जियां उड़ा रहा था, तब विभाग के जिम्मेदार इंजीनियर साहब कहाँ थे वे साइट पर मौन साधकर तमाशा देख रहे थे या फिर इस मौन व्रत’ की कीमत पहले ही तय हो चुकी थी इंजीनियर की यह रहस्यमयी खामोशी साफ गवाही दे रही है कि यहाँ ‘जनहित’ से बड़ा ‘जेब हित’ था
आखिर मौन क्यों बैठे हैं आला अधिकारी
पथर्री पारा की जनता अब तीखे सवाल पूछ रही है
कार्रवाई से डर कैसा? ऐसे लापरवाह और भ्रष्ट इंजीनियरों पर अब तक गाज क्यों नहीं गिरी
मौन का राज क्या है? विभाग के आला अधिकारी इस पूरे मामले पर आँखें मूंदकर क्यों बैठे हैं? क्या नीचे से लेकर ऊपर तक ‘गंगा उल्टी बह रही है’?
जनता की दो टूक जाँच हो और रिकवरी हो
सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हुए इस तमाशे से वार्ड वासी ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं लोगों की मांग है कि इस घटिया निर्माण की तत्काल उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए और ‘मौन’ इंजीनियर की जेब से इस बर्बादी की रिकवरी की जाए।






