रायगढ़,22 मई । कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कंज्यूमर पंप संचालकों की बैठक में कठोर शब्दों में हिदायत दी है। कलेक्टर के तेवर देखकर संचालक एकबारगी सहम गए हैं। कलेक्टर ने कहा कि अपनी गाडिय़ों के लिए डीजल मंगवाइए, वरना जो कार्रवाई होगी वह किसी ने नहीं सोची होगी। डीजल का जो खेल परदे के पीछे चल रहा है, वही किल्लत की वजह है। गुरुवार को कलेक्टर ने कंज्यूमर पंप संचालकों की बैठक में साफ कहा कि डीजल मंगवाइए, अन्यथा जो कार्रवाई होगी, वह किसी ने नहीं सोचा होगा। डीजल की किल्लत के लिए कंज्यूमर पंप ही जिम्मेदार हैं। वर्तमान में पेट्रोल को लेकर ज्यादा दिक्कत नहीं है। परेशानी डीजल की है।
उद्योगों में चलने वाले भारी वाहनों को डीजल आपूर्ति के लिए कंज्यूमर पंप हैं। जिले में कंज्यूमर पंप की संख्या 52 है। कुछ महीने पहते तक जब कंज्यूमर डीजल की कीमत रिटेल से कम थी तो प्लांटों को परेशानी नहीं थी। बहुत आराम से लोड मंगवाए जाते रहे। जैसे ही कंज्यूमर डीजल महंगा हुआ, इन्होंने हाथ पीछे खींच लिए। इन 52 पंपों ने अप्रैल 2025 में 12458 किलोलीटर डीजल मंगवाया था। अप्रैल 2026 में इन्होंने मात्र 8481 किलोलीटर डीजल मंगवाया गया, जबकि डिमांड 14000 किलोलीटर की है। मतलब वास्तविक जरूरत से करीब 6000 किलोलीटर कम मंगवाया गया। जिले में सामान्य रिटेल पंपों की संख्या 140 है। इन पंपों में अप्रैल 2025 में 12928 किलोलीटर डीजल मंगवाया गया था, जिसकी तुलना में अप्रैल 2026 में 15804 किलोलीटर डीजल आया। मतलब सामान्य पंपों में 3000 किलोलीटर डीजल अधिक आया, फिर भी किल्लत हो रही है। दरअसल भारी वाहनों के लिए भी डीजल भी इन्हीं रिटेल पंपों से लिया जा रहा है।
सीधे गाड़ी न लगाकर दूसरे वाहनों से भी डीजल मंगवाया जा रहा है। उसे फिर हाईवा या ट्रेलर में शिफ्ट किया जा रहा है। डीजल के इस खेल में रिटेल पंप संचालक मालामाल हो गए हैं। वर्तमान में सामान्य डीजल की कीमत करीब 98 रुपए प्रति लीटर है। वहीं कंज्यूमर डीजल करीब 135 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है। कोई ट्रांसपोर्टर अपने पास के रिटेल पंप संचालक को 113-115 रुपए की दर से डीजल देने का ऑफर देता है। सामान्य डीजल की वास्तविक कीमत से 15 रुपए अधिक मिलने पर संचालक भी हामी भर देता है। मतलब एक दिन में 1000 लीटर सामान्य डीजल भारी वाहनों को दिया गया तो बिना कुछ किए 15 हजार रुपए की अतिरिक्त कमाई हो गई। यह केवल एक उदाहरण है। प्रतिदिन लाखों की अवैध कमाई भी हो रही है। जिले में एक पंप पर जरीकेन लेकर लोगों की लाइन लगी थी। इसकी सूचना मिली तो खाद्य विभाग ने जरीकेन में डीजल नहीं देने का आदेश दिया। इसके बाद पंप के सामने रोड पर ही लोगों ने हंगामा किया। पुलिस ने वहां पहुंचकर मामला संभाला। दरअसल ट्रैक्टर में डीजल लेने के नाम पर भी कई कारोबारी अपने कर्मचारियों को पंप भेज रहे हैं। एक ही आदमी दिन भर में कई बार डीजल ले रहा है। जमाखोरी से भी इंकार नहीं किया जा सकता।






