कोरबा। ऊर्जाधानी कोरबा में इन दिनों पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते हुए बैटरी स्क्रैप (अपशिष्ट) का अवैध कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। नियमों को ताक पर रखकर व्यापारी चंद पैसों के मुनाफे के लिए शहर और आसपास के क्षेत्रों को बड़े खतरे में डाल रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल में पर्यावरण विभाग के कड़े नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।
तिरपाल के नीचे छिपा है ‘कैंसर’ का खतरा
बैटरी स्क्रैप बेहद जहरीला और खतरनाक श्रेणी में आता है। इसमें मौजूद लेड (शीशा) और एसिडिक तत्व हवा, पानी और मिट्टी को बुरी तरह प्रदूषित करते हैं, जिससे कैंसर, सांस की बीमारियां और नर्वस सिस्टम डैमेज होने जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा होते हैं।
नियम क्या कहता है?
नियमानुसार, बैटरी स्क्रैप का परिवहन पूरी तरह से बंद (कवर्ड/कंटेनर) गाड़ियों में होना चाहिए ताकि इसका कोई भी हिस्सा या गैस बाहर न फैले। साथ ही, इसके परिवहन के लिए पर्यावरण विभाग से विशेष परमिट अनिवार्य है।
हकीकत: कोरबा में इस जहरीले कचरे को खुली गाड़ियों में मात्र एक तिरपाल से ढककर बेखौफ दौड़ाया जा रहा है, जिससे रास्ते भर राहगीरों और रिहायशी इलाकों पर खतरा मंडराता रहता है।
सिर्फ GST बिल का खेल, अथॉरिटी के नाम पर ‘डब्बा गोल’
इस अवैध कारोबार का सबसे बड़ा पहलू यह है कि व्यापारी केवल जीएसटी (GST) बिल को ही अपना ‘सुरक्षा कवच’ मान बैठे हैं।
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