सक्ति वेदांता हादसा : 15+ मौत, 50+ झुलसे… अब प्रबंधन की संवेदनशीलता पर उठे सबसे बड़े सवाल, प्रिया अग्रवाल घायल मजदूरों को छोड़ क्यों पहुंच गई त्रिवेणी भवन ? “मजदूर झुलसते रहे… और प्राथमिकताएं कुछ और ?” हादसे के बाद रुख पर गरमाई बहस
सक्ती/छत्तीसगढ़। सिंघीतराई स्थित वेदांता लिमिटेड के 1200 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट में हुआ भीषण बॉयलर ब्लास्ट अब सिर्फ एक औद्योगिक हादसा नहीं रहा, बल्कि पूरे सिस्टम, सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है।
ताजा जानकारी के अनुसार मृतकों का आंकड़ा 10 से अधिक बताया जा रहा है, जबकि 30 से ज्यादा मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं। कई घायलों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है, जिससे मौत का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाका इतना शक्तिशाली था कि मेन स्टीम लाइन फटने के साथ ही पूरा क्षेत्र धुएं और मलबे में तब्दील हो गया। मौके पर काम कर रहे मजदूर सीधे इसकी चपेट में आ गए और कई को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
रेस्क्यू ऑपरेशन—जिंदगी और मौत की जंग
हादसे के बाद तुरंत पुलिस, दमकल और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को खरसिया, रायगढ़ और आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई मजदूर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
अस्पतालों में चीख-पुकार, परिजनों की बेचैनी और लगातार बढ़ता दबाव—पूरा माहौल दर्द और अफरा-तफरी से भरा हुआ है।
ठेकेदार कंपनियों के मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित
प्राथमिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में राहुल इंटरप्राइजेज के मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जबकि मालती कंस्ट्रक्शन और पावर मेक से जुड़े श्रमिक भी इस हादसे की चपेट में आए हैं।
यानी सबसे ज्यादा मार उन मजदूरों पर पड़ी, जो रोजी-रोटी के लिए प्लांट में काम कर रहे थे।
सुरक्षा मानकों पर बड़ा सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली को लेकर उठ रहा है। मजदूरों का आरोप है कि लंबे समय से सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी और कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अगर यह सच है, तो यह हादसा नहीं बल्कि लापरवाही का परिणाम माना जाएगा।


