कोरबा। जिला प्रशासन के सख्त आदेश और मानसून के दौरान लगे सरकारी बैन (प्रतिबंध) को ठेंगा दिखाते हुए कोरबा जिले में रेत माफियाओं का राज चल रहा है। नदिया खार स्थित नदी तट पर तड़के सुबह 4 बजते ही ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट शुरू हो जाती है। अंधेरे का फायदा उठाकर माफिया नदी का सीना चीर
रहे हैं और बिना किसी रॉयल्टी या सरकारी अनुमति के बेधड़क रेत का अवैध उत्खनन कर रहे हैं।
🚫 10 जून से 15 अक्टूबर तक पूरी तरह बैन, फिर भी ट्रैक्टर तैयार
नियमों के मुताबिक, पर्यावरण संरक्षण और नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने के लिए 10 जून से 15 अक्टूबर तक पूरे कोरबा जिले के तमाम रेत घाटों पर उत्खनन पूरी तरह से प्रतिबंधित है
लेकिन रेत माफियाओं के लिए कलेक्टर साहब का आदेश महज एक कागज़ का टुकड़ा बनकर रह गया है। न इन्हें कानून का खौफ है और न ही प्रशासन की कार्रवाई का डर। ऐसा लगता है जैसे नियमों को तोड़ना और नदियों को नुकसान पहुंचाना इनके लिए आम बात बन चुकी है।
🚜 चने-मुर्रे की तरह निकल रही रेत, सिर्फ नदिया खार नहीं… पूरा जिला परेशान
यह स्थिति सिर्फ नदिया खार तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के लगभग सभी प्रमुख रेत घाटों का यही हाल है। माफिया दिन-रात चने-मुर्रे की तरह बिना रोक-टोक अवैध रेत निकाल रहे हैं। इससे न केवल नदियों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है, बल्कि शासन को भी हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।
सवाल यह है कि तड़के 4 बजे से दौड़ रहे इन ट्रैक्टरों पर खनिज विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ती
क्या माफियाओं को किसी का संरक्षण प्राप्त है?





