कोरबा/पाली:- छत्तीसगढ़ सरकार की पोषण आहार योजना का उद्देश्य कुपोषण मुक्त भारत बनाना है। इसके तहत गर्भवती, शिशुवती माताओं, 6 साल तक के बच्चों और किशोरी बालिका को प्रति सप्ताह रेडी टू ईट पोषण आहार दिया जाना है। किंतु पाली परियोजना में जमीनी हकीकत इसके उलट है और पोषण आहार आपूर्तिकर्ता समूह की मनमानी से सैकड़ो हितग्राहियों का पोषण प्रभावित हो रहा है।
शासन की महत्वकांक्षी पोषण आहार योजना पाली परियोजना में अधिकतर कागजों पर संचालित हो रहा है। सूत्रों के अनुसार बीते सप्ताह के मंगलवार को पोड़ी, सिल्ली, लाफा, माखनपुर, सपलवा सहित अनेको सेक्टरों के आंगनबाड़ियों में रेडी टू ईट पोषण आहार नही पहुँचा। इससे किशोरी बालिकाएं, गर्भवती, शिशुवती माताएं और 0 से 6 वर्ष के सैकड़ों बच्चे पोषण से वंचित रह गए। नियमानुसार प्रत्येक मंगलवार को आंगनबाड़ियों में पोषण आहार का वितरण किया जाना है, लेकिन रेडी टू ईट बनाने और आपूर्ति करने वाले स्व सहायता समूह ने बीते मंगलवार को कई सेक्टरों में आहार की आपूर्ति ही नही की। इस मामले में नाम उजागर न करने की शर्त पर कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि जब पोषण आहार ही नही पहुँचा तो हितग्राहियों को खाली हाथ लौटना पड़ा। इससे नाराज ग्रामीणों ने उन्हें खरी- खोटी सुनाई और उन पर पोषण आहार गबन करने का आरोप तक लगाया गया। कार्यकर्ताओं का यह भी आरोप है कि आंगनबाडी की दर्ज संख्या से भी कम पोषण आहार पैकेट की आपूर्ति की जाती है। ऐसे में वितरण करते समय भारी परेशानी होती है और विवाद की स्थिति बनती है। यह समस्या विशेषकर दूरस्थ, वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों की आंगनबाड़ियों में ज्यादा है। इस मामले में परियोजना अधिकारी पर भी लापरवाही का आरोप लगा है, जिसके तहत उक्त अधिकारी कभी आंगनबाड़ियों का निरीक्षण नही करते और परियाजना कार्यालय के वातानुकुलित कक्ष में बैठे- बैठे अपने कर्तव्यों की इश्रीति करते हुए शासन से मोटी पगार ले रहे हैं। परियोजना अधिकारी के इसी निष्क्रियता का लाभ उठाकर स्व सहायता समूह की मनमानी चल रही है और समय पर पोषण आहार आपूर्ति नही होने के साथ कम मात्रा में दिया जा रहा है। यह लापरवाही व मनमानी बच्चों के वजन और गर्भवती की सेहत पर भारी पड़ रहा है। जब समय और सही मात्रा पर पोषण आहार नही पहुँचेगा तो शासन के कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ का सपना कैसे साकार होगा? इस मामले में जिला प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेकर आपूर्ति श्रृंखला दुरस्त करने के साथ ही परियोजना अधिकारी पर जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है, ताकि इस योजना पर मनमानी भारी न हो।





