जिला कोरबा प्रशासन के कड़े तेवरों और कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बावजूद कोरबा में रेत माफिया के हौसले बुलंद हैं। एनजीटी (NGT) के नियमों और कलेक्टर के स्पष्ट प्रतिबंध के बाद भी जिले के रेत घाटों पर माफिया बेखौफ होकर नदियों का सीना चीर रहे हैं। न तो इन्हें कानून का डर है और न ही जिला प्रशासन के किसी आदेश का भय।

खनिज विभाग के जिम्मेदार फोन उठाने से भी कतरा रहे
हैरानी की बात तो यह है कि जब तमाम वैध रेत घाट बंद हैं, तब माफिया को बेधड़क उत्खनन करने की हिम्मत कहाँ से मिल रही है? मामले की जानकारी देने और स्थिति की गंभीरता बताने के लिए जब खनिज विभाग के फील्ड अफसरों को बार-बार फोन लगाया गया, तो अधिकारियों ने फोन उठाना तक उचित नहीं समझा। फोन की घंटी बजती रही, लेकिन जवाब शून्य मिला। ज़िम्मेदारों की यह चुप्पी और ढुलमुल रवैया सीधे तौर पर माफिया से साठगांठ की ओर इशारा कर रहा है।
मिलीभगत के खेल से उठते गंभीर सवाल:
कलेक्टर के आदेश बेअसर: जब पूरे जिले में अवैध उत्खनन पर रोक है, तो नदियों में भारी-भरकम मशीनें उतारकर पोकलेन और जेसीबी से रेत कौन निकाल रहा है?
अधिकारियों की चुप्पी: खनिज विभाग के जिम्मेदार अफसर फोन उठाना बंद करके किसे संरक्षण दे रहे हैं?
प्रशासनिक साख पर धब्बा: क्या खनिज अमले की मौन सहमति से ही माफिया दिन-रात नदियों का अस्तित्व मिटाने में लगे हैं?
जमीन पर लगातार जारी इस अवैध खेल ने साबित कर दिया है कि नीचे के अधिकारी कलेक्टर के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस बड़ी लापरवाही और मिलीभगत पर जिला कलेक्टर महोदय क्या कड़ा एक्शन लेते हैं या फिर जिम्मेदार अधिकारी इसी तरह आंखें मूंदकर रेत माफिया को खुली छूट देते रहेंगे।



























