*कोरबा/पाली:-* कटघोरा वनमंडल का पाली वन परिक्षेत्र अन्य प्रांतों की भेंड़- बकरियों के झुंडों की लगातार दस्तक से कराह रहा है। पिछले एक माह से हजारों की संख्या में राजस्थान और गुजरात के चरवाहे विभिन्न सर्कलों के जंगलों को रौंद रहे हैं, नर्सरी वनों व वनस्पति और कीमती औषधीय पौधों को चट कर रहे हैं। वहीं जंगल बचाने की जिम्मेदारी जिन बीट कर्मचारियों पर है, वहीं जंगल को बेचने में लगे हैं। इसे लेकर पाली ब्लाक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष ने सवाल खड़े किए हैं और डीएफओ से राजस्थान- गुजरात भेड़ बकरियों के पाली वन परिक्षेत्र में घुसपैठ पर सख्ती से रोक लगाने अपेक्षित मांग की है।
इस मामले को लेकर ब्लाक कांग्रेस कमेटी पाली के अध्यक्ष सत्यनारायण पैकरा ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर हमला बोलते हुए कहा कि यह सब बीट स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नही है। उन्होंने आगे कहा कि चरवाहे बेलगहना के जंगली रास्ते से अपनी भेड़- बकरियां लेकर पाली परिक्षेत्र के जंगल मे प्रवेश करते हैं और बतरा, भादा- नगोई से होते हुए अपने गतंव्य की ओर निकलते हैं। इस दौरान ये जंगल मे ही अस्थायी तंबू लगाकर कई- कई दिनों तक डेरा डाले रहते हैं और जहां डेरा डालते हैं, वहां की हरियाली पूरी तरह खत्म हो जाती है। उन्होंने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए तीखे शब्दों में कहा है- पाली के जंगलों में हो रही इस अवैध चराई की पुख्ता जानकारी बीट स्तर के प्रत्येक कर्मचारी को रहती है। कौन कहां से घुसा, कहां डेरा डाला है, सब पता होता है। लेकिन निजी स्वार्थ सिद्धि के लिए उन्होंने राजस्थान- गुजरात के चरवाहों को खुली छूट दे दी है। वनांचल के ग्रामीण जब इसका विरोध करते हैं तो उन्हें ही धमकाया जाता है। ऊपर के अधिकारी भी इसे गंभीरता से नही लेते, महज खानापूर्ति की कार्रवाई कर अपने कर्तव्यों की इश्रीति कर लेते हैं। नतीजा यह है कि विभाग की उदासीनता के चलते लाखों रुपये की लागत से तैयार की गई नर्सरी, साल, सागौन के छोटे पौधें और दुर्लभ औषधीय जड़ी- बूटियां इस अवैध चराई की भेंट चढ़ जा रही है। इस दखल से वन्यप्राणी भी अपना प्राकृतिक रहवास छोड़ इधर- उधर भटकने मजबूर हैं। आश्चर्य की बात है कि शासन स्तर पर अन्य प्रांतों की भेंड़- बकरियों की चराई पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद पाली परिक्षेत्र में यह बेधड़क चल रहा है। अगर यही हाल रहा तो पाली का जंगल कुछ सालों में बंजर हो जाएगा। सत्यनारायण पैकरा ने वनमंडलाधिकारी कटघोरा से अपेक्षित मांग की है कि वे स्वयं संज्ञान लेकर भ्रष्ट्र बीट कर्मियों के साथ चरवाहों पर भी कठोर कार्रवाई करें।


