SN इंडिया न्यूज | कोरबा।
जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन दुकानों तक पहुंचने वाले चावल की सप्लाई व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामने आए वीडियो में चावल के ऐसे बोरे नजर आ रहे हैं, जो जगह-जगह से फटे हुए हैं। इन बारदानों से परिवहन के दौरान चावल बाहर गिरता दिखाई दे रहा है।
मामला सिर्फ फटे बारदानों तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि यदि चावल गोदाम से ही खराब बोरे में रवाना किया गया, तो रास्ते में होने वाली खाद्यान्न की कमी और बर्बादी की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी
बारदान फटा, चावल गिरा… नुकसान किसके खाते में?
पीडीएस दुकान संचालकों का कहना है कि उन्हें राशन का पूरा हिसाब रखना पड़ता है। ऐसे में यदि सप्लाई के दौरान ही बोरे फटे हों और चावल रास्ते में गिरकर कम हो जाए, तो बाद में कमी का हिसाब दुकान संचालक के खाते में आने की आशंका बनी रहती है।
सबसे बड़ी चिंता यह भी है कि सड़क या जमीन पर गिरा चावल धूल-मिट्टी और अन्य गंदगी के संपर्क में आ सकता है। ऐसे में हितग्राहियों को मिलने वाले खाद्यान्न की स्वच्छता और गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
गोदाम से निकलने से पहले नहीं होती बारदानों की जांच?
पीडीएस व्यवस्था में खाद्यान्न को सुरक्षित तरीके से राशन दुकानों तक पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि गोदाम से चावल रवाना करने से पहले बारदानों की स्थिति की जांच कौन करता है?
यदि बोरे पहले से ही कटे-फटे हैं, तो उन्हें बदलने की जिम्मेदारी किसकी है? और यदि परिवहन के दौरान चावल गिरकर बर्बाद हो रहा है, तो उस नुकसान का आकलन और जवाबदेही कैसे तय होगी
दुकानदारों की परेशानी बढ़ी, विभाग से कार्रवाई की उम्मीद
राशन दुकान संचालकों की मांग है कि दुकानों तक चावल भेजने से पहले बारदानों की स्थिति की ठीक तरह से जांच की जाए। खराब या फटे बारदानों को बदलकर ही खाद्यान्न की सप्लाई की जाए, ताकि रास्ते में अनाज की बर्बादी न हो और बाद में दुकानदारों पर कमी का अतिरिक्त दबाव न आए।
अब देखने वाली बात होगी कि नान गोदाम से निकलने वाले खाद्यान्न की पैकेजिंग और परिवहन व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारी क्या संज्ञान लेते हैं।
क्योंकि सवाल सीधा है—
जब अनाज गोदाम से निकलते समय ही सुरक्षित नहीं है, तो हितग्राही तक पहुंचते-पहुंचते उसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही किसकी तय होगी?


