इस बात में कोई दो राय नहीं कि हमारी सरकारें कॉर्पोरेट्स के आगे नतमस्तक हैं इसीलिये औद्योगिक संस्थानों की अराजकता चरम पर है, यही कारण है कि आम आदमी दबा कुचला महसूस करने लगा है। इन अराजक औद्योगिक संस्थानों खनन परियोजनाओं में कामगारों की सुरक्षा और परियोजना प्रक्षेत्र में सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने का बड़ा ढोल पीटा जाता है मगर अब तक वो सिर्फ़ काग़ज़ी ही होता आया है। कारखानों और खनन परियोजनाओं में काम करने वाले श्रमवीरों की सुरक्षा को लेकर ग़ैर ज़िम्मेदार कारखानों में इंसान की ज़िंदगी किसी कीड़े मकोड़े से कम नहीं होती। यही कारण है कि इन औद्योगिक इकाईयों खनन परियोजनाओं में सुरक्षा उपायों की चूक के कारण छोटी बड़ी दुर्घटनाएं आम हो गई हैं। लंबे समय से रायगढ़ जिले में संचालित छोटे बड़े मंझौले उद्योगों में दुर्घटनाओं की वजह से बड़ी तादाद में लोग अपनी जानें गंवा चुके हैं। JSPL पतरापाली का हाॅपर हादसा, कोरबा वेस्ट बड़े भंडार का कूलिंग टाॅवर हादसा और अब सक्ती जिले के सिंघीतराई में स्थापित वेदांता के पाॅवर प्लांट में बाॅयलर ब्लास्ट हादसा साबित करता है कि कारखाना के कामगारों (ख़ासकर ठेका श्रमिकों) की सुरक्षा को लेकर कोई भी उद्योग प्रबंधन गंभीर नहीं है। हाल ही में रायगढ़ जिले की अगर बात करें तो रूपानाधाम उद्योग और महालक्ष्मी कास्टिंग्स में ऊंचाई से गिरकर कामगार की मौत ने भी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं। कितनी बड़ी विडंबना है कि औद्योगिक इकाईयों में कामगारों की सुरक्षा उपायों पर नज़र रखने वाला सरकारी विभाग महज़ सफ़ेद हाथी बनकर रह गया है।
कितनी अजीब बात है कि चंद पलों पहले जो लोग ज़िंदा होते हैं, उनके नामों से उनकी पहचान होती है, वो ऐसे हादसों में अपनी जान गंवाकर केवल आंकड़ों में तब्दील होकर रह जाते हैं। वेदांता वाला बाॅयलर हादसा तो इतना बड़ा हो गया जिसमें अब तक डेढ़ दर्जन से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं और दर्जनों घायल कामगारों का ईलाज जारी है, इस हादसे की गूंज देशभर में सुनाई दी और मृतकों घायलों के परिवारों के लिये कई स्तर पर मुआवज़े का ऐलान हादसे के चौबीस घंटे के भीतर हो गया। बड़ी अच्छी बात है, मगर उन हादसों का क्या जिनमें जान गंवाने वाले परिजनों पर दबाव बनाकर कंपनी के पक्ष में बयान दिलवा दिये जाते हैं और ऐसे बयानों की बदौलत औद्योगिक सुरक्षा विभाग की खानापूर्ति वाली रिपोर्ट से थोड़े बहुत आर्थिक दंड के बाद मामला सेट कर लिया जाता है।
वेदांता बाॅयलर हादसे के बाद जो एफ़आईआर दर्ज़ हुई है उसमें लगभग 20 लोगों के साथ वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल को भी आरोपी बनाया गया है, देर से ही सही मगर ये अच्छी शुरूआत है, अब रायगढ़ में भी ये उम्मीद जगी है कि औद्योगिक दुर्घटनाओं के बाद संबंधित उद्योगों के प्रबंधकों के साथ साथ मालिकों/भागीदारों को भी आरोपी बनाया जायेगा।
वेदांता बाॅयलर हादसे के दौरान असमय काल के आगोश में समाये श्रमवीरों के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि, उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदना और सभी घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना
साथ ही हाल ही में रायगढ़ के रूपानाधाम और महालक्ष्मी कास्टिंग्स हादसे में मृत श्रमवीरों को भी विनम्र श्रद्धांजलि




