कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा:- छत्तीसगढ़ सरकार भले ही शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लाख दावे कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। यह तस्वीर किसी फिल्म की नहीं, बल्कि कोरबा जिले के खंड शिक्षा कार्यालय पोड़ी उपरोड़ा अंतर्गत आने वाले प्राथमिक शाला अचानकपुर की है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन तस्वीरों में स्कूल के प्रधान पाठक कुंज बिहारी रात्रे कभी स्कूल की बेंच को ही बिस्तर बनाकर गहरी नींद में सो रहे हैं, तो कभी क्लास में बैठकर मोबाइल पर व्यस्त दिख रहे हैं। जबकि नियमानुसार उन्हें बच्चों को पढ़ाना था।
एक ही परिसर में दो स्कूल, दोनों की हालत बेहाल
बताया जा रहा है कि अचानकपुर में प्राथमिक और माध्यमिक शाला एक ही परिसर में संचालित होती है। प्राथमिक में 32 और माध्यमिक में 18, कुल 50 बच्चे दर्ज हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि माध्यमिक शाला में पदस्थ शिक्षक गजेंद्र कुमार भास्कर, जो सुतर्रा संकुल समन्वयक भी हैं, वे खुद अनियमित रहते हैं और उन्हें नियमित 3 कालखंड पढ़ाने का निर्देश है, लेकिन वे कभी- कभार ही स्कूल आते हैं। इसी लचर व्यवस्था का फायदा उठाकर प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक कुंज बिहारी रात्रे भी मनमानी पर उतारू हैं। ग्रामीणों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि वे नशा सेवन कर स्कूल आते हैं।
शिक्षा विभाग बना मूकदर्शक
सोशल मीडिया पर यह शर्मनाक तस्वीरें सामने आने के बाद भी शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई सार्वजनिक नहीं हुई है। सवाल यह है कि जब गुरु ही कक्षा में सोएगा और मोबाइल देखेगा, तो बच्चों की पढ़ाई का स्तर कैसा होगा? अचानकपुर के दर्जनों गरीब, आदिवासी बच्चों के माता- पिता अपने बच्चों को इस उम्मीद से स्कूल भेजते हैं कि उनका भविष्य सुधरेगा, लेकिन यहां तो शिक्षक ही भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इस लापरवाही पर तत्काल सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है, अन्यथा शासन की पूरी शिक्षा व्यवस्था पर से ही लोगों का भरोसा उठ जाएगा।


