कोरबा। इतवारी बाजार के समीप मुख्य मार्ग पर संचालित अलंकार डेयरी के आसपास गंदगी का आलम लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। आरोप है कि डेयरी से निकलने वाले दूध के खाली पैकेट, पॉलिथीन और अन्य अनुपयोगी सामान सड़क किनारे ही फेंके जा रहे हैं। देखते ही देखते यह कचरा मुख्य मार्ग के किनारे ढेर का रूप लेता जा रहा है, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे चिंता की बात यह है कि सड़क किनारे पड़े इस कचरे के बीच जानवर भी पहुंच रहे हैं और कचरे में पड़ी सामग्री को खाते हुए नजर आ रहे हैं। इससे पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। मौके से सामने आए वीडियो में जानवरों को कचरे के ढेर के आसपास भोजन तलाशते और कचरा खाते हुए देखा जा सकता है।
यह इलाका शहर के प्रमुख मार्गों में शामिल है, जहां सुबह से देर शाम तक वाहनों और राहगीरों की लगातार आवाजाही रहती है। ऐसे व्यस्त मार्ग के किनारे कचरे का ढेर लगा रहना न केवल शहर की तस्वीर बिगाड़ रहा है, बल्कि आसपास के लोगों और राहगीरों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है। कचरे से दुर्गंध फैलने के साथ आवारा पशुओं का जमावड़ा भी बढ़ने की आशंका है।
बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। सड़क किनारे पड़ा प्लास्टिक और पॉलिथीन नालियों में पहुंचने पर जल निकासी बाधित कर सकता है। वहीं, यदि पशु लगातार प्लास्टिक व अन्य अनुपयोगी सामग्री खाते हैं तो उनके लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे के उचित निपटारे की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या कचरा सड़क किनारे फेंकने पर कोई निगरानी या कार्रवाई की व्यवस्था है? और यदि व्यवस्था है तो मुख्य मार्ग के किनारे खुले में कचरा जमा कैसे हो रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के प्रमुख और व्यस्त मार्ग पर नियमित सफाई के साथ कचरे के उचित निपटारे की व्यवस्था जरूरी है। लोगों ने संबंधित नगर निगम अमले से मामले का संज्ञान लेकर मौके की सफाई कराने तथा कचरा सड़क किनारे न पहुंचे, इसके लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
सवाल सिर्फ गंदगी का नहीं है—सवाल शहर की साफ-सफाई, सार्वजनिक स्थानों की जिम्मेदारी और उन बेजुबान जानवरों की सुरक्षा का भी है, जो मजबूरी में इसी कचरे के बीच भोजन तलाशते नजर आ रहे हैं।
वीडियो में देखिए—मुख्य मार्ग किनारे पड़े कचरे के बीच जानवर किस तरह कचरा खाते नजर आ रहे हैं।



