लोक जनशक्ति पार्टी ने कलेक्टर से की शिकायत, पूछा—जब्ती-नापजोख और पंचनामा के बिना रेत को मिट्टी में मिलाने की जरूरत क्यों पड़ी? अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
कोरबा। बालको वन परिक्षेत्र अंतर्गत चुइया नाला में कथित अवैध रेत उत्खनन, भंडारण और परिवहन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के कोरबा जिलाध्यक्ष राजकुमार दुबे ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर खनिज विभाग की कार्रवाई और मौके पर अपनाई गई प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चुइया नाला क्षेत्र में बड़ी मात्रा में रेत का कथित अवैध भंडारण किया गया था। मामले की जानकारी खनिज विभाग को दिए जाने के बाद विभागीय टीम मौके पर पहुंची, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार रेत की विधिवत नापजोख, पंचनामा और जब्ती की कार्रवाई करने के बजाय जेसीबी से रेत को मिट्टी में मिलाकर समतल कर दिया गया।

रेत जब्त हुई या मौके पर ही खत्म कर दिया गया?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मौके पर अवैध भंडारण पाया गया था तो उसकी मात्रा कितनी थी, उसका पंचनामा क्यों नहीं बनाया गया और उसकी जब्ती किस प्रक्रिया के तहत हुई? शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि रेत को समतल करने से कार्रवाई से जुड़े महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य समाप्त हो गए।
शिकायत में छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 तथा खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के तहत मामले की जांच की मांग की गई है।
NGT के निर्देशों की अनदेखी का भी आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि चुइया नाला क्षेत्र में कथित रूप से बड़ी मात्रा में रेत का भंडारण किया गया था और इसे लेकर पहले भी विभाग को सूचना दी गई थी। स्थानीय लोगों एवं शिकायतकर्ता की ओर से एनजीटी के निर्देशों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि शिकायत के बाद विभागीय टीम मौके पर पहुंची थी, तो पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी, नापजोख, पंचनामा और जब्ती का रिकॉर्ड क्या तैयार किया गया? यदि किया गया है तो उसे सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं?
राजस्व नुकसान का मुद्दा भी उठा
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि अवैध रूप से भंडारित रेत की मात्रा निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाती तो शासन को राजस्व प्राप्त हो सकता था। मौके पर रेत समतल किए जाने से संभावित रॉयल्टी एवं राजस्व नुकसान का आकलन करने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
साथ ही मौके पर मौजूद खनिज विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच तथा कथित अवैध उत्खनन एवं परिवहन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है।
कॉल डिटेल से लेकर पुलिस जांच तक की मांग
मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने घटना के समय मौके पर मौजूद विभागीय अमले और कथित रेत कारोबार से जुड़े लोगों के बीच हुए संपर्कों की जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन की जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कर स्वतंत्र पुलिस जांच की मांग भी की गई है।
मीडिया के सवालों पर खनिज विभाग से जवाब का इंतजार
मामले को लेकर मीडिया द्वारा खनिज विभाग के अधिकारी प्रमोद नायक से जानकारी लेने का प्रयास किए जाने का उल्लेख भी शिकायत/रिपोर्ट में है। आरोप है कि अधिकारी ने मामले पर स्पष्ट जानकारी देने से दूरी बनाई। हालांकि, विभाग की ओर से इस पूरे मामले पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना अभी बाकी है।
अब असली सवाल यही है—अगर रेत अवैध थी तो उसकी मात्रा दर्ज कर जब्ती और नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर मौके पर रेत समतल करना नियमसम्मत कार्रवाई थी, तो उसका आदेश, पंचनामा और पूरा रिकॉर्ड क्या है?
चुइया नाला की रेत पर उठे इन सवालों का जवाब अब खनिज विभाग को देना होगा।

